नाना पाटेकर के निधन के बाद Medico-Legal Case दर्ज, क्या संदिग्ध है एक्टर की मौत?
भोपाल के न्यू मार्केट में बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में अचानक आग लग गई. आग की लपटें करीब 25 फीट तक उठीं और धुआं 2 किमी दूर तक दिखाई दिया। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं.
Nana Patekar Death: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. गोवा स्थित उनके घर पर उनकी तबीयत बिगड़ी थी. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक CPR देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. अस्पताल की ओर से उनकी मौत की शुरुआती वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई है. हालांकि, इस मामले में Medico-Legal Case यानी MLC दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम भी कराया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर MLC क्या होता है और क्या इसका मतलब नाना पाटेकर की मौत संदिग्ध थी?
कैसे हुई नाना पाटेकर की मौत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाना पाटेकर ने रात करीब 2:30 बजे अपने एक दोस्त को तबीयत खराब होने और सीने के बाईं तरफ दर्द की जानकारी दी थी. बाद में उनकी हालत बिगड़ गई और वे अपने गोवा स्थित घर पर बेहोशी की हालत में मिले. उनके केयरटेकर ने अस्पताल से मेडिकल टीम और एंबुलेंस बुलवाई. टीम जब उनके घर पहुंची, तब नाना रिस्पॉन्स नहीं कर रहे थे. इसके बाद वहीं CPR शुरू किया गया और CPR देते हुए उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया.
मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, अस्पताल में भी करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका. डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर कार्डियक अरेस्ट को मौत की वजह बताया है.
फिर MLC क्यों दर्ज किया गया?
यहीं से पूरा मामला समझना जरूरी है. Medico-Legal Case यानी MLC दर्ज होना अपने आप में किसी अपराध, साजिश या संदिग्ध मौत का सबूत नहीं होता. MLC उन परिस्थितियों में दर्ज किया जा सकता है, जहां किसी व्यक्ति की बीमारी, चोट या मौत से जुड़े तथ्यों को कानूनी रिकॉर्ड में दर्ज करना जरूरी हो. खास तौर पर जब किसी व्यक्ति की मौत अस्पताल के बाहर हुई हो और वह अस्पताल का नियमित या पंजीकृत मरीज न रहा हो, तो अस्पताल पुलिस को सूचना देकर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपना सकता है.
नाना पाटेकर के मामले में भी रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अस्पताल के रजिस्टर्ड मरीज नहीं थे. मेडिकल टीम उन्हें उनके घर से अस्पताल लेकर आई थी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई.
क्या MLC का मतलब मौत संदिग्ध है?
नहीं। सिर्फ MLC दर्ज होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नाना पाटेकर की मौत संदिग्ध थी. MLC का मकसद ऐसी मौत या घटना का मेडिकल और कानूनी रिकॉर्ड तैयार करना होता है, ताकि मौत की परिस्थितियों को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया जा सके. जरूरत पड़ने पर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम के जरिए मौत के कारण की पुष्टि की जाती है. नाना पाटेकर के मामले में फिलहाल अस्पताल की ओर से कार्डियक अरेस्ट को मौत की वजह बताया गया है. हालांकि, अंतिम मेडिकल निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
नाना पाटेकर का शव पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है. इसलिए फिलहाल MLC को लेकर किसी तरह की साजिश या संदिग्ध मौत की अटकल लगाना जल्दबाजी होगी. पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि उनकी मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था.
यानी आसान भाषा में समझें तो MLC दर्ज होना कोई FIR या हत्या की जांच का सबूत नहीं है. यह एक कानूनी-मेडिकल प्रक्रिया है, जिसे कुछ परिस्थितियों में अस्पताल को अपनाना पड़ता है. नाना पाटेकर की मौत को लेकर अभी तक उपलब्ध जानकारी में कार्डियक अरेस्ट ही शुरुआती कारण बताया गया है.

