कान्हा में 41 दिन इलाज के बाद मादा बाघ की मौत, CDV की आशंका

कमजोर हालत में मिली बाघिन ने तोड़ा दम: मौत की वजह जानने फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम के बाद विसरा और नमूने जांच के लिए जबलपुर भेजे गए

कान्हा में 41 दिन इलाज के बाद मादा बाघ की मौत, CDV की आशंका

कान्हा टाइगर रिजर्व में करीब 41 दिन तक इलाज के बाद एक मादा बाघ की मौत हो गई। बाघिन को 26 अगस्त को गश्ती दल ने बेहद कमजोर हालत में अकेले देखा था। इसके बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद में 27 अगस्त से लगातार उपचार शुरू किया गया। तमाम प्रयासों के बावजूद 6 अक्टूबर को बाघिन ने दम तोड़ दिया।

41 दिन तक चला इलाज

वन विभाग के अनुसार, बाघिन की हालत काफी कमजोर थी। उसके इलाज में कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सा अधिकारी और बैहर के पशु चिकित्सक शामिल रहे। लगातार उपचार और निगरानी के बाद भी उसकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

बाघिन की मौत के बाद NTCA की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत 7 अक्टूबर को संयुक्त पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के जरूरी अंगों और अन्य नमूनों को जांच के लिए सुरक्षित किया गया।

जबलपुर भेजे गए नमूने

विभाग ने सभी जरूरी नमूने फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर की प्रयोगशाला भेजे हैं। शुरुआती तौर पर बाघिन की मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

बीमारी या कमजोरी, रिपोर्ट से होगा खुलासा

विभाग के मुताबिक बाघिन के लगातार कमजोर होने और उपचार के दौरान उसकी मौत की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उसकी बीमारी, कमजोरी का वास्तविक कारण और मौत की प्राथमिक वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चलेगा कि मौत बीमारी, कुपोषण या किसी अन्य कारण से हुई। पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के दौरान कान्हा के क्षेत्र संचालक, उपसंचालक, सहायक संचालक, रेंजर, NTCA प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।