18 साल पुराने व्यापमं कंप्यूटर घोटाले के सबूत खा गए दीमक: अब फोटोकॉपी के भरोसे होगा इंसाफ
भोपाल की अदालत में 18 साल पुराने व्यापमं कंप्यूटर घोटाले के मूल दस्तावेज दीमक खा गए। ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में यह बात मानी और फोटोकॉपी दस्तावेजों को सबूत के तौर पर पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों की दलीलें खारिज कर दीं। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
भोपाल: व्यापमं घोटाले से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह मामला व्यापमं कंप्यूटर खरीदी घोटाले से जुड़ा है और करीब 18 साल पुराना है। भोपाल कोर्ट के रिकॉर्ड रूम में रखे इस केस के मूल दस्तावेज दीमक खा गए हैं। इस बात को खुद ईओडब्ल्यू ने भोपाल कोर्ट में स्वीकार किया है। अब यह पूरा केस फोटोकॉपी दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगा।
कैसे सामने आया दीमक वाला मामला
18 साल पहले व्यापमं कंप्यूटर खरीदी घोटाले में चालान पेश किया गया था। उस समय मूल दस्तावेजों से ही फोटोकॉपी कराई गई थी। इसके बाद मूल रिकॉर्ड कोर्ट के रिकॉर्ड रूम में रखवा दिया गया था। जब दोबारा दस्तावेज मांगे गए तो पता चला कि वे दीमक खा चुके हैं। इसकी जानकारी मिलते ही विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह की कोर्ट में यह मुद्दा उठाया गया। ईओडब्ल्यू ने साफ कहा कि दस्तावेज नष्ट होने का उन्हें कोई अंदाजा नहीं था।
कोर्ट ने क्या कहा
बचाव पक्ष ने दीमक से नष्ट हुए दस्तावेजों का कड़ा विरोध जताया। बचाव पक्ष ने कोर्ट में मूल दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह साफ नहीं है कि दस्तावेज कब और कैसे नष्ट हुए। हालांकि कोर्ट ने माना कि चालान पेश करते समय ही मूल दस्तावेजों से फोटोकॉपी कराई गई थी। इसी आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया कि फोटोकॉपी को ही द्वितीय साक्ष्य माना जाएगा। इसे सेकेंडरी एविडेंस के तौर पर मामले में इस्तेमाल किया जाएगा।
आरोपियों की दलीलें खारिज
दूसरी तरफ आरोपी पक्ष ने दीमक से जुड़ी दलील को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आरोपी पक्ष का तर्क था कि बिना मूल दस्तावेज के सुनवाई ठीक नहीं होगी। कोर्ट ने आरोपियों की यह दलील खारिज कर दी। अदालत ने ईओडब्ल्यू के आवेदन को स्वीकार करते हुए फोटोकॉपी को साक्ष्य में शामिल कर लिया। साथ ही कोर्ट ने विवेचक को शेष मुख्य परीक्षण के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख दी है। यानी अब इसी तारीख से आगे की सुनवाई शुरु होगी।
क्या है पूरा घोटाला
दरअसल साल 2008 में व्यापमं द्वारा 78 कंप्यूटरों और सर्वरों की खरीदी की गई थी। इसी खरीदी में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया था। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने बाजार मूल्य से दोगुनी दरों पर कंप्यूटर खरीदे थे। आरोपियों ने टेंडर नियमों को भी ताक पर रखकर फर्म को फायदा पहुंचाया था। इससे सरकारी खजाने को सीधा 43 लाख रूपए का नुकसान हुआ था। इसी शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज हुआ था।
18 साल में कितनी हुई मौतें
यह मामला 2008 से लंबित है और अब तक 18 साल बीत चुके हैं। इस दौरान मामले से जुड़े कुल 16 आरोपियों में से 5 की मौत हो चुकी है। मृतकों में अरुण गुप्ता, पी प्रकाश राव, अशोक कुमार बाथम, रमेश दुबे और तुलसीदास अग्रवाल शामिल हैं। अब कोर्ट में बीसी दुबे, आशीष साह, डॉ एस श्रीवास्तव, योगेशचंद्र उपरीति के खिलाफ सुनवाई चलेगी। इनके अलावा यूएस विजयवर्गीय, अशोक मिश्रा, ओपी सोनी, ओपी टिकारिया, अजय सेन, नितिन मल्होत्रा और जावेद अख्तर पर भी केस चल रहा है। इस मामले में एक आरोपी राधा बेलानी फरार बताई जा रही है।
आरोपियों ने कैसे पहुंचाया फायदा
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने पूरी खरीदी प्रक्रिया में मिलीभगत की थी। फर्म को जानबूझकर फायदा पहुंचाने के लिए तय नियमों की अनदेखी की गई थी। ऊंची दर पर कंप्यूटर खरीदकर सरकारी पैसे का सीधा नुकसान कराया गया। इसी वजह से यह मामला व्यापमं के बड़े घोटालों में गिना जाता है। लंबे समय से चल रही सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है।
अब आगे क्या होगा
फोटोकॉपी दस्तावेजों को साक्ष्य में शामिल किए जाने के बाद अब जांच तेज होने की उम्मीद है। कोर्ट में 14 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई होगी। इस सुनवाई में विवेचक का मुख्य परीक्षण पूरा किया जाएगा। इसके बाद बचे हुए आरोपियों पर आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। मामले से जुड़े लोग इस फैसले का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

