MP विधानसभा बजट सत्र का पांचवां दिन
MP विधानसभा बजट सत्र का पांचवां दिन सदन में बजट पर होगी चर्चा। चर्चा के लिए 4 घंटे का समय निर्धारित।
भोपाल: 20 फरवरी को मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन है, जहां सदन में बजट पर चर्चा होगी। बजट पर चर्चा के लिए 4 घंटे का समय निर्धारित किया गया है तीन अशासकीय संकल्प भी सदन में पेश किए जाएंगे। तीनों संकल्पों के लिए 30-30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, जबकि इसके साथ 10 ध्यानाकर्षण, 74 याचिकाएं सदन में आएंगी सदन में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा और मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पटल पर रखेंगे पत्र।
चौथे दिन जमकर हुआ हंगामा
19 फरवरी को बजट सत्र के चौथखे दिन सदन में उस वक्त भारी हंगामा हो गया, जब चर्चा में अडानी समूह का नाम आया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस ‘तू-तू, मैं-मैं’ और ‘औकात’ दिखाने तक पहुंच गई। स्थिति इस कदर बिगड़ी कि सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस ने इसे आदिवासी का अपमान बताकर जमकर नारेबाजी की।
शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान हुई। सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अडानी समूह पर मेहरबान है। उन्हें सवा लाख करोड़ रु. देने की तैयारी है। सिंघार ने दावा किया कि सरकारी फाइलें अडानी के दफ्तर में देखी जा रही हैं। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई कि जो व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं है, उसका नाम न लें। सिंघार ने कहा कि उनके पास इसके प्रमाण हैं, तो विजयवर्गीय बोले- है तो रखो।
विजयवर्गीय ने कहा- अपनी औकात में रहें नेता प्रतिपक्ष
बहस इतनी बड़ी कि विजयवर्गीय बिफर गए और उन्होंने सिंघार को टोकते हुए कहा- अपनी औकात में रहें नेता प्रतिपक्ष। इस पर पलटवार करते हुए सिंघार ने कहा- मैं तुम्हें औकात दिखा दूंगा। दोनों दिग्गजों के बीच निजी हमले होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक उत्तेजित होकर गर्भगृह में आ गए। 10 मिनट तक हंगामे की स्थिति बनी रही। सत्र के बाद सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विजयवर्गीयजी, मैं अपनी औकात में हूं।
नेता प्रतिपक्ष-संसदीय कार्यमंत्री ने सीमा तोड़ी
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज का दिन कुछ गरम-गरम था। उन्होंने कहा-पटवा जी कहते थे कि सदन में बात रखते समय गुस्सा दिखना चाहिए, लेकिन आना नहीं चाहिए। लेकिन आज गुस्सा आ गया दोनों पक्षों की तरफ से। नेता प्रतिपक्ष बहुत अनुभवी हैं और संसदीय कार्य मंत्री अनुभवों से लदे हैं, लेकिन फिर भी आज सीमा टूट गई। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे का यहीं पटाक्षेप करें। बाद में दोनों ने खेद जताया।
विपक्ष का आरोप - गंदे पानी से मौतें सरकारी हत्या, इस्तीफा दें मंत्री
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर हंगामे के बीच 4 बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष ने गंदे पानी से हुई मौतों को सरकारी हत्या बताकर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगा। जवाब में सत्तापक्ष ने इतिहास याद दिलाते हुए विपक्ष से पूछा कि भोपाल गैस कांड के वक्त कांग्रेस की नैतिकता कहां थी।
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के सवाल पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला के जवाब के बाद शुरू हुई जुबानी जंग इतनी गंभीर हो गई कि विपक्ष और सत्तापक्ष विधायक गर्भगृह में आमने-सामने आ गए। इस दौरान सदन की कार्यवाही तीन घंटे तक बाधित रही। पूरा विपक्ष मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग पर अड़ गया और धरने पर बैठ गया।
गतिरोध खत्म करने 45 मिनट चर्चा
हंगामे के बीच कैलाश विजयवर्गीय अपनी सीट छोड़कर मुख्यमंत्री के पास जाकर बैठे। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ला और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल भी चर्चा के लिए पहुंचे। माहौल तनावपूर्ण रहा। इसके बाद सीएम और विजयवर्गीय विधानसभा अध्यक्ष के चेंबर में गए। बाद में उमंग सिंघार और भंवर सिंह शेखावत को भी बुलाया गया। करीब 45 मिनट चर्चा के बाद अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 20 फरवरी को चर्चा का आश्वासन दिया जिसके बाद गतिरोध समाप्त हुआ।
सरकार ने माना - मरीजों के स्टूल में मिला कॉलेरा और ई-कोलाई
विधानसभा में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि 29 दिसंबर को भागीरथपुरा के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आईडीएसपी शाखा को जलजनित बीमारी के प्रकोप की सूचना मिली। 21 दिसंबर के बाद से अब तक 22 लोगों की एक्यूट डायरियल डिजीज से मौत की पुष्टि हुई है। 459 लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें 4 का इलाज जारी है। जांच में पानी और स्टूल सैंपल से कॉलेरा और ई-कोलाई की पुष्टि हुई है।
इस पर बहस हो सकती है या नहीं
भागीरथपुरा मुद्दे पर सवाल आते ही विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए चर्चा से अवमानना की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से संयम बरतने को कहा। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विचाराधीन मामलों पर न सवाल लिया जा सकता है, न चर्चा कराई जा सकती है। पूर्व विस अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने भी आपत्ति जताई। इस पर उमंग सिंघार ने तर्क दिया कि व्यापमं और मंदसौर जैसे मामलों पर चर्चा हुई है, तो यहां क्यों नहीं। बाद में अध्यक्ष ने सवाल पूछने की अनुमति दे दी।

