Bangladesh Election 2026: वोटिंग के दौरान झड़प में BNP कार्यकर्ता की मौत, 2 वोटिंग सेंटर के बाहर फेंके गए बम
बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी, अब तक 33% मतदान हुआ, BNP-जमात में मुकाबला
बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। देशभर में सुबह 7:30 बजे से वोट डाले जा रहे हैं, जो शाम 4:30 बजे तक जारी रहेंगे। अब तक देश के 33 हजार वोटिंग सेंटर्स पर 33% मतदान हुआ है।
यदि निर्धारित समय तक मतदाता कतार में खड़े रहते हैं तो उन्हें भी मतदान का अवसर दिया जाएगा। मतगणना 12 फरवरी की शाम 4 बजे से शुरू होगी और चुनाव आयोग 13 फरवरी की सुबह अंतिम परिणाम घोषित करेगा। इस चुनाव में 51 राजनीतिक दल सत्ता की दौड़ में शामिल हैं और कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 249 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं।

BNP कार्यकर्ता की मौत, 2 वोटिंग सेंटर के बाहर धमाके
वोटिंग के दौरान खुलना में एक वोटिंग सेंटर के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प में एक BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई। BNP का कहना है कि उनकी मौत तब हुई जब जमात के एक नेता ने उन्हें धक्का दे दिया, जिससे वो पेड़ से टकरा गए। वहीं, जमात नेता का दावा है कि मोहिबुज्जमान हंगामे के दौरान बीमार पड़ गए थे और उन्हें हार्ट अटैक आ गया, जिससे उनकी मौत हो गई।
उधर बांग्लादेश के मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में वोटिंग सेंटर के बाहर देसी बम फेंके गए। मुंशीगंज-3 में धमाके के बाद कुछ देर के लिए वोटिंग रोकी गई थी, जो अब फिर से शुरू हो गई है। वहीं गोपालगंज सदर इलाके में धमाके से दो अंसार जवान (अर्द्धसैनिक बल) और एक 14 साल की लड़की घायल हो गई।
BNP को चुनौती देने के लिए बना 11 दलों का गठबंधन
देश में इस बार लगभग 12.7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 वर्ष आयु वर्ग के हैं। इनमें से करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए खास रणनीतियां बनाई हैं।
BNP को चुनौती देने के लिए जमात के नेतृत्व में 11 दलों का गठबंधन बनाया गया है। ‘वन बॉक्स पॉलिसी’ के तहत यह गठबंधन वोटों के बंटवारे को रोकने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसमें जमात-ए-इस्लामी, NCP, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी, एबी पार्टी, बांग्लादेश लेबर पार्टी समेत कई अन्य दल शामिल हैं।
पीएम पद की दौड़ में तीन बड़े चेहरे:-
इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख चेहरे उभरकर सामने आए हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम भी इस दौड़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
तारिक रहमान सबसे आगे
तारिक रहमान हाल ही में 25 जनवरी को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी के पांच दिन बाद ही उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद BNP की पूरी कमान तारिक के हाथों में आ गई। दिसंबर में हुए ओपिनियन पोल्स के मुताबिक BNP को करीब 70% लोगों का समर्थन मिलता दिखाई दिया था, जिससे तारिक की स्थिति और मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि तारिक पर 2001 से 2006 के बीच BNP शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें 18 महीने जेल में रहना पड़ा। 2008 में वे इलाज के बहाने लंदन चले गए और लंबे समय तक वहीं से पार्टी का संचालन करते रहे। टाइम मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश में रहने के बावजूद पार्टी की रणनीति और आंदोलन उनकी ही दिशा में चलते रहे।
वर्तमान चुनाव में तारिक खुद को एक शांत, नीतिगत और विकासोन्मुख नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने हर साल 5 करोड़ पेड़ लगाने, ढाका में नए ग्रीन जोन विकसित करने और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे वादे किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मां के निधन के बाद मिली सहानुभूति लहर भी उनके पक्ष में जा सकती है।
जमात-ए-इस्लामी और शफीकुर रहमान
प्रधानमंत्री पद की दौड़ में दूसरा बड़ा नाम जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान का है। जमात को लंबे समय से एक कट्टर इस्लामी पार्टी के रूप में देखा जाता रहा है। पार्टी अब तक कभी सत्ता में नहीं आ सकी, लेकिन उसका एक संगठित वोट बैंक माना जाता है, खासकर धार्मिक प्रभाव वाले इलाकों में।
हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने शफीकुर रहमान से मुलाकात की है। अमेरिकी वेबसाइट ‘द इंटरसेप्ट’ ने दावा किया है कि अमेरिका दक्षिण एशिया में संतुलन की रणनीति के तहत जमात को एक उदार इस्लामी पार्टी के रूप में देख रहा है और उसे समर्थन देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जमात-ए-इस्लामी का अतीत उसकी सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है। 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के दौरान पार्टी ने पाकिस्तान का समर्थन किया था और उसके कुछ नेताओं पर आजादी समर्थकों के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के आरोप लगे थे। 1972 में पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसे 1975 में हटा लिया गया। आज भी देश के एक बड़े वर्ग में पार्टी को लेकर नाराजगी है। बावजूद इसके, पार्टी का दावा है कि उसके करीब 2 करोड़ समर्थक और 2.5 लाख पंजीकृत सदस्य हैं।
छात्र आंदोलन से निकले नाहिद इस्लाम
तीसरा अहम चेहरा नाहिद इस्लाम का है, जो सबसे युवा दावेदार माने जा रहे हैं। वे मई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ शुरू हुए छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे। आंदोलन के दौरान वे ‘स्टूडेंट अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ मंच के संयोजक रहे और उन्हें पुलिस हिरासत में भी लिया गया था।
हसीना सरकार के हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार में नाहिद को सूचना, डाक और दूरसंचार विभागों का सलाहकार बनाया गया था। कुछ महीनों बाद उन्होंने इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और फरवरी 2025 में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया।
NCP को शहरी क्षेत्रों, छात्रों और पहली बार वोट देने वाले युवाओं का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि पार्टी ने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
चुनावी व्यवस्था, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
बांग्लादेश की चुनावी प्रणाली भारत की तरह फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली पर आधारित है। देश की संसद, जिसे जातीय संसद कहा जाता है, में कुल 350 सदस्य होते हैं। इनमें से 300 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिन्हें पार्टियों के अनुपात के आधार पर आवंटित किया जाता है। बहुमत हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन का नेता प्रधानमंत्री बनता है।
गृह सलाहकार एमडी जहांगीर आलम चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि मतदान के दौरान मतपेटी छीनने, फर्जी मतदान या किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश की गई तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस चुनाव को बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। जहां एक ओर अनुभवी राजनीतिक परिवार से जुड़े तारिक रहमान मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं, वहीं जमात और युवा नेतृत्व वाली NCP भी मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। अब सबकी नजरें 13 फरवरी को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
बांग्लादेश में चुनाव से एक दिन पहले हिंदू की हत्या
बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले में मतदान से एक दिन पहले 28 साल के एक हिंदू युवक का शव मिला। युवक की पहचान रतन साहुकार के रूप में हुई है। उनके शरीर पर कई चोट के निशान थे और हाथ-पैर बंधे हुए थे। पुलिस ने बुधवार को कमलगंज उपजिला के चम्पारा चाय बागान से शव बरामद किया। यह जगह ढाका से करीब 200 किलोमीटर दूर है।
सुबह करीब 10 बजे स्थानीय लोगों ने शव देखा और पुलिस को खबर दी। शरीर पर गहरे घाव और खून के निशान थे, जिससे साफ है कि हत्या बेरहमी से की गई। रतन चाय बागान में मजदूरी करते थे। परिवार के मुताबिक वह पिछली रात से लापता थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दो दिनों में किसी हिंदू व्यक्ति की यह दूसरी हत्या है। इससे चुनाव के समय अल्पसंख्यक समुदाय में डर और चिंता बढ़ गई है।
Varsha Shrivastava 
