रीवा जवा छात्रावास में अधीक्षिका पर परिवारवाद के आरोप, 5 साल से एक ही जगह पदस्थापना पर उठे सवाल

रीवा जिले के जवा क्षेत्र स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास शितलहा में अधीक्षिका गणेश कुमारी वर्मा पर लंबे समय से एक ही छात्रावास में पदस्थ रहने, मनमानी करने और परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं।

रीवा जवा छात्रावास में अधीक्षिका पर परिवारवाद के आरोप, 5 साल से एक ही जगह पदस्थापना पर उठे सवाल

रीवा जिले के जवा जनपद अंतर्गत नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास शितलहा इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक अराजकता को लेकर सुर्खियों में है। यहाँ नियम-कायदों को ताक पर रखकर छात्रावास को एक 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' की तरह चलाया जा रहा है।

 व्यवस्था पर खड़े हो रहे सवाल:
कुर्सी से मोह:
अधीक्षिका गणेश कुमारी वर्मा पिछले 5 वर्षों से एक ही छात्रावास में अंगद की तरह पैर जमाए बैठी हैं।

परिवारवाद का चरम:
सूत्रों का दावा है कि अधीक्षिका ने नियमों को दरकिनार कर अपनी बेटी को रसोइया और पति को चौकीदार के पद पर तैनात कर रखा है।

नियमों की अनदेखी:
सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता के लिए समय-समय पर स्थानांतरण (Transfer) अनिवार्य है, लेकिन यहाँ शासन के आदेश बेअसर साबित हो रहे हैं।

सरकारी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिन्ह:
शितलहा छात्रावास की यह स्थिति शिक्षा और आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। स्थानीय अभिभावकों और नागरिकों का आरोप है कि छात्रावास अब छात्रों के भविष्य संवारने के केंद्र के बजाय एक पारिवारिक व्यवस्था केंद्र बनकर रह गया है।

जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विभाग के आला अधिकारी आँखें मूंद लें, तो व्यवस्था का ढहना निश्चित है। आखिर किसके संरक्षण में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

जांच के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी:
सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस 'पारिवारिक नियुक्तियों' की भनक नहीं है या फिर इस पूरे खेल में ऊपर तक हिस्सा पहुँच रहा है. क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि छात्रावास में कई व्यवस्थागत कमियां हैं, लेकिन अधीक्षिका के रसूख के आगे सब दबे हुए हैं।

अब आगे क्या:
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।