पाकिस्तान की अपील पर ट्रंप का बड़ा फैसला, होर्मुज ऑपरेशन 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' बंद
होर्मुज स्ट्रेट में रोका गया प्रोजेक्ट फ्रीडम, अब जहाजों को अब सुरक्षा नहीं देगा अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर हुआ फैसला, ट्रंप बोले- ईरान से समझौते की उम्मीद
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने नौसैनिक ऑपरेशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह ऑपरेशन हाल ही में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालना था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है और इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। ट्रंप के अनुसार, पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों की अपील के बाद इस ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोका गया है, ताकि शांति समझौते की संभावना को परखा जा सके।
क्या है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन?
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अमेरिका द्वारा शुरू किया गया एक सैन्य अभियान है। इसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। यह वही समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है।
इस मिशन के तहत अमेरिका ने बड़ी सैन्य ताकत तैनात की थी, जिसमें 15,000 से अधिक सैनिक, युद्धपोत, हेलीकॉप्टर और 100 से ज्यादा विमान शामिल थे। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा कई जहाजों पर हमले किए गए, जिसके कारण यह कदम उठाया गया।

हालांकि ऑपरेशन शुरू होने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, क्योंकि क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक दो दिन में केवल कुछ ही जहाज सुरक्षित निकल पाए, जबकि सामान्य दिनों में यहां से सैकड़ों जहाज गुजरते हैं।
ट्रंप का बयान और ऑपरेशन रोकने का फैसला
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर यह तय किया गया है कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को कुछ समय के लिए रोक दिया जाए।

ट्रंप के अनुसार, यह निर्णय आपसी सहमति और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों के तहत लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर दबाव और कुछ प्रतिबंधात्मक कदम अभी भी जारी रहेंगे।
ईरान की प्रतिक्रिया और सैन्य गतिविधियां
ईरान ने अमेरिका के इस पूरे अभियान को पहले से ही उकसाने वाला कदम बताया था। ऑपरेशन शुरू होने के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने होर्मुज के पास कुछ क्षेत्रों में जहाजों को निशाना बनाया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ईरान ने चेतावनी दी है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी जहाज इस क्षेत्र से नहीं गुजर सकता। साथ ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने UAE को चेतावनी दी कि वह अपने क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिका या इजराइल की सैन्य गतिविधियों के लिए न होने दे। ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मामला बताया है, जबकि पश्चिमी देश इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा मान रहे हैं।
UN में प्रस्ताव और वैश्विक प्रतिक्रिया
इस संकट को देखते हुए अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसमें मांग की गई है कि ईरान तुरंत समुद्री हमले, बारूदी सुरंगें (माइंस) लगाने और टोल वसूली जैसी गतिविधियां बंद करे।
वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा है कि उसकी रक्षा प्रणाली ने अधिकतर मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोक दिया है। हालांकि क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है। भारत ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। भारत ने कहा है कि किसी भी नागरिक या सामान्य ढांचे पर हमला अस्वीकार्य है और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
चीन और अन्य देशों की स्थिति
इस पूरे संकट का असर वैश्विक व्यापार पर भी दिख रहा है। चीन ने ऐसे हालात में अपनी कंपनियों को विदेशी प्रतिबंधों के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए एक नया कानून बनाया है। इसका उद्देश्य उन कंपनियों को बचाना है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं और अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं।
दूसरी ओर कई देश होर्मुज में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश युद्धपोत को भी होर्मुज स्ट्रेट में भेजा है। इसका उद्देश्य उन जहाजों को सुरक्षा देना बताया गया है जो इस समय वहां फंसे हुए हैं।
हालांकि, अमेरिका और ईरान दोनों के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो यह संकट और बढ़ सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है। फिलहाल ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के रोक दिए जाने को एक अस्थायी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है।
Varsha Shrivastava 
