कर्ज से जूझते पाकिस्तान ने 50 साल बाद शराब एक्सपोर्ट शुरू किया

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने बड़ा कदम उठाते हुए करीब 50 साल बाद शराब के निर्यात की शुरुआत की है। जानिए इसके पीछे की वजह, क्या होगा असर और कैसे बदलेगी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था।

कर्ज से जूझते पाकिस्तान ने 50 साल बाद शराब एक्सपोर्ट शुरू किया

इस्लामाबाद..भारी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान आर्थिक संकट से निकलने के लिए पुरानी नीतियों को बदलने लगा है। करीब 50 साल पहले इस्लाम के हवाले से लगाए गए शराब बैन के बाद देश ने पहली बार फिर से अल्कोहलिक ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान की इकलौती स्थानीय शराब कंपनी मरी ब्रूअरी (Murree Brewery) ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड को बीयर तथा अन्य अल्कोहलिक पेय निर्यात किए हैं। कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह ने बताया कि अभी शुरुआती चरण में विदेशी बाजार में नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। आगे उत्पादन बढ़ाकर ज्यादा देशों में सप्लाई करने की योजना है।

सरकार ने 2025 में शराब निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन केवल उन देशों को सप्लाई की जा रही है जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के सदस्य नहीं हैं। पाकिस्तान में मुस्लिम बहुल आबादी के लिए शराब पर लगभग 50 साल पहले प्रतिबंध लगा दिया गया था, हालांकि गैर-मुस्लिमों और विदेशियों के लिए सीमित छूट बरकरार रखी गई।


गंभीर आर्थिक संकट..
पाकिस्तान पर फिलहाल 138 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज है। वित्त वर्ष 2026 में सरकार की कुल आय करीब 11,072 अरब पाकिस्तानी रुपए (40 अरब डॉलर) रहने का अनुमान है, जबकि खर्च 16,286 अरब रुपए (58 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है। सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में ही 8,200 अरब रुपए (30 अरब डॉलर) खर्च हो रहे हैं। सरकारी कर्ज अकेले 92 अरब डॉलर के करीब है।

इसी आर्थिक दबाव के चलते सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने का फैसला किया। मरी ब्रूअरी पिछले कई सालों से केवल नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट्स (जूस, मिनरल वाटर, फ्रूट ड्रिंक्स) का एक्सपोर्ट कर रही थी। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की कमाई 100 मिलियन डॉलर (28 अरब PKR) रही। कंपनी के CEO इस्फानयार भंडारा ने लंबे समय से एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए प्रयासरत थे।

भुट्टो-जिया काल की नीति..
1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने राजनीतिक दबाव में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उस समय उनके खिलाफ पश्चिमी जीवनशैली अपनाने के आरोप लग रहे थे। विपक्षी दलों की मांग पर नाइट क्लब और बार बंद किए गए। भुट्टो की सरकार गिरने के बाद जनरल जिया-उल-हक ने सत्ता संभाली और इस्लामी कानूनों के तहत शराब पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए। मुसलमानों के लिए शराब पीना-बेचना गैरकानूनी घोषित कर दिया गया।


जनरल परवेज मुशर्रफ के समय (1999-2008) में कानूनों में कुछ ढील दी गई, जिससे व्यावहारिक रूप से शराब की उपलब्धता बढ़ गई।
विवाद और दावे धार्मिक संगठन शराबबंदी को सही से लागू न करने का आरोप लगाते हैं। वहीं आलोचक कहते हैं कि प्रतिबंध के कारण अवैध शराब माफिया सक्रिय हुआ और जहरीली शराब से कई मौतें हुईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि 1977-79 की पाबंदियों के बाद हेरोइन जैसी भारी ड्रग्स की तरफ रुझान बढ़ा। 1979 में हेरोइन के केवल दो मामले दर्ज थे, जो 1985 तक पाकिस्तान को दुनिया का बड़ा उपभोक्ता बना चुके थे।


दक्षिण एशिया में शराब का इतिहास बहुत पुराना है। सिंधु घाटी सभ्यता में भी शराब बनाई जाती थी। मुगल काल में शराब, भांग और अफीम आम थे। अब आर्थिक मजबूरी के आगे पाकिस्तान पुरानी नीतियों से समझौता कर रहा है। मरी ब्रूअरी अब भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे पुराने बाजारों में वापसी की तैयारी कर रही है। कर्ज के बोझ से दबा देश विदेशी मुद्रा कमाने के हर वैध रास्ते आजमा रहा है।