NCRB रिपोर्ट: भारत में अपहरण के10 साल में आए 50% से अधिक मामले
देश में अपहरण और जबरन उठा ले जाने की घटनाओं में पिछले एक दशक में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक 1953 से 2024 के बीच दर्ज 20 लाख से ज्यादा मामलों में 54% केस केवल 2013-2024 के दौरान सामने आए।
देश में अपराध के बदलते स्वरूप और सुरक्षा व्यवस्था पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है। विश्लेषण के मुताबिक, पिछले 70 सालों में देश में जितने अपहरण हुए, उनमें से आधे से ज्यादा मामले केवल पिछले एक दशक में दर्ज किए गए हैं।
अपहरण के आंकड़ों का विश्लेषण..
आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 1953 से 2024 के बीच (करीब 71 साल) भारत में कुल 20 लाख से अधिक अपहरण के मामले दर्ज हुए।
दशक का खौफ..
कुल मामलों का 54% (11.24 लाख केस) केवल पिछले 11 वर्षों (2013-2024) में सामने आए हैं।
बढ़ती हिस्सेदारी..
कुल दर्ज अपराधों में अपहरण की हिस्सेदारी जो 1953-62 में महज 1.01% थी, वह अब बढ़कर 3.04% हो गई है। यानी अपराध के ग्राफ में अपहरण का हिस्सा तीन गुना बढ़ गया है।
फिरौती नहीं, ये हैं अपहरण की मुख्य वजहें..
आमतौर पर अपहरण को फिरौती (Ransom) से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं, सिर्फ 0.7% मामले फिरौती के लिए किए जाने वाले संगठित अपहरण कुल मामलों का एक प्रतिशत भी नहीं हैं।
मुख्य कारण..
अधिकांश मामलों में महिलाओं को शादी के लिए उठाना या सामान्य रंजिश और आपसी विवाद अपहरण की मुख्य वजह रहे हैं।
राज्यों की स्थिति..
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र इस सूची में ऊपर बने हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बिहार, जो कभी अपहरण के लिए कुख्यात था, 2024 के आंकड़ों में शीर्ष छह राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है।
बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध..
90% केस अश्लीलता से जुड़े, रिपोर्ट का सबसे काला अध्याय बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध हैं।

साइबर क्राइम..
बच्चों के खिलाफ दर्ज साइबर अपराधों में से 10 में से 9 मामलों में यौन रूप से अश्लील कंटेंट को पब्लिश या ट्रांसमिट करने का अपराध पाया गया है।

बढ़ता ग्राफ..
2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,87,702 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल (2023) की तुलना में 5.8% अधिक हैं।
दिल्ली..
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सबसे असुरक्षित मेट्रो सिटी, NCRB 2024 की रिपोर्ट में राजधानी दिल्ली एक बार फिर कटघरे में है
महिला अपराध..
दिल्ली मेट्रो शहरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में शीर्ष (Top) पर है। साल 2024 में यहाँ महिलाओं के खिलाफ 13,396 केस दर्ज हुए।

बुजुर्गों की सुरक्षा..
दिल्ली बुजुर्गों के लिए भी सबसे असुरक्षित शहर बनकर उभरा है।

भोपाल में हाल ही में एक आईएएस एकेडमी की निदेशक के अपहरण और 1.89 करोड़ की फिरौती की घटना ने यह साबित कर दिया है कि भले ही फिरौती के मामले कम (0.7%) हों, लेकिन ये अभी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विशेषकर बच्चों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते साइबर और शारीरिक अपराध समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।

