योगी सरकार में बड़ा फेरबदल तय, मनोज पांडेय-पूजा पाल बन सकते हैं मंत्री

योगी मंत्रिमंडल विस्तार: कल 6 नए मंत्री ले सकते हैं शपथ, सपा के बागी मनोज पांडेय और पूजा पाल समेत कई नए चेहरों की चर्चा

योगी सरकार में बड़ा फेरबदल तय, मनोज पांडेय-पूजा पाल बन सकते हैं मंत्री

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति चर्चाओं में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार रविवार को दूसरी बार मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रही है। माना जा रहा है कि इस विस्तार में 5 से 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शनिवार शाम सीएम योगी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने पर खास ध्यान दे रही है। दलित, पिछड़ा, ब्राह्मण और महिला वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति तैयार की गई है। साथ ही विपक्षी दलों से आए नेताओं को भी सरकार में जगह देकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है।

मनोज पांडेय और पूजा पाल पर सबसे ज्यादा चर्चा

इस मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी से अलग हुए विधायक मनोज पांडेय और पूजा पाल की है। दोनों नेताओं का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। मनोज पांडेय को अवध और पूर्वांचल क्षेत्र में बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा लाइन से अलग रुख अपनाया था, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। भाजपा अब उन्हें मंत्री बनाकर ब्राह्मण समाज को बड़ा संदेश देना चाहती है।

वहीं, कौशांबी की विधायक पूजा पाल भी मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। पूजा पाल लंबे समय से अपराध और माफिया के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। उनके पति और भाई की हत्या चर्चित मामला रही थी। भाजपा उन्हें महिला और पिछड़े वर्ग दोनों के प्रतिनिधित्व के तौर पर देख रही है।

इन नेताओं के नाम भी चर्चा में

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई और नाम भी सामने आ रहे हैं। इनमें नाई समाज से एमएलसी रामचंद्र प्रधान और विश्वकर्मा समाज से एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा के नाम प्रमुख हैं।

इसके अलावा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। चौधरी जाट समाज से आते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत पकड़ रखते हैं। 2022 में उन्हें मंत्री पद छोड़कर संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी। अब माना जा रहा है कि उन्हें दोबारा सरकार में शामिल किया जा सकता है।

ब्राह्मण नाराजगी दूर करने की कोशिश

ब्राह्मण चेहरों में पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा और भाजपा प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला के नाम भी चर्चा में हैं। वहीं कृष्णा पासवान का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है।

भाजपा इस समय उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज की नाराजगी को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है। हाल के महीनों में कई मुद्दों पर ब्राह्मण समाज की नाराजगी सामने आई है। शंकराचार्य विवाद, UGC नियमों पर चर्चा और पुलिस भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े विवाद को लेकर भाजपा के अंदर भी चिंता जताई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा संगठन और सरकार की बैठकों में ब्राह्मण समाज को संतुष्ट करने पर जोर दिया गया है। योगी मंत्रिमंडल में अभी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कुल सात ब्राह्मण मंत्री हैं। लेकिन जितिन प्रसाद के केंद्र सरकार में जाने के बाद एक जगह खाली मानी जा रही है। यही वजह है कि इस बार दो ब्राह्मण नेताओं को मंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज है।

दलित और महिला प्रतिनिधित्व पर फोकस

मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा दलित वर्ग को भी साधने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की 86 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या भाजपा के पास है। सरकार में अभी बेबीरानी मौर्य समेत कुल आठ दलित मंत्री हैं, लेकिन पार्टी मानती है कि इस वर्ग को और प्रतिनिधित्व देने की जरूरत है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक या दो नए दलित चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। भाजपा हाल के महीनों में अंबेडकर जयंती कार्यक्रमों और दलित संपर्क अभियानों के जरिए इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

महिलाओं को लेकर भी भाजपा नई रणनीति पर काम कर रही है। यूपी विधानसभा में इस समय 51 महिला विधायक हैं, लेकिन योगी सरकार में सिर्फ पांच महिला मंत्री हैं। ऐसे में पार्टी महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है। पूजा पाल जैसी नेताओं को शामिल करने की चर्चा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

पिछड़े वर्ग और जाट समीकरण भी अहम

भाजपा का सबसे बड़ा सामाजिक आधार पिछड़ा वर्ग माना जाता है। योगी सरकार में पहले से कई बड़े ओबीसी चेहरे शामिल हैं, लेकिन पार्टी इस वर्ग में अपना प्रभाव और मजबूत करना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार, इस बार पिछड़े वर्ग से भी एक या दो नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। जाट समाज से भूपेंद्र सिंह चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं रामचंद्र प्रधान जैसे नेताओं के जरिए नाई समाज को साधने की कोशिश हो सकती है।

कुछ मंत्रियों का हो सकता है प्रमोशन

मंत्रिमंडल विस्तार में सिर्फ नए चेहरे ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन भी हो सकता है। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के कैबिनेट मंत्री बनने की चर्चा है। इसके अलावा जेपीएस राठौर, गुलाब देवी और दिनेश प्रताप सिंह के नाम भी प्रमोशन की सूची में बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। भाजपा आने वाले समय में हर सामाजिक वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।