भारत में सूखे और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ा, जुलाई तक एक्टिव हो सकता है अल-नीनो

अमेरिकी मौसम एजेंसी National Oceanic and Atmospheric Administration के मुताबिक इस साल अल-नीनो के मई-जुलाई के दौरान एक्टिव होने की 82% संभावना है। इसके असर से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे सूखा, हीटवेव और सामान्य से कम बारिश की आशंका बढ़ गई है।

भारत में सूखे और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ा, जुलाई तक एक्टिव हो सकता है अल-नीनो

इस साल भारत में सामान्य से कम बारिश, सूखे और लंबे हीटवेव की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो की स्थिति मई-जुलाई 2026 के दौरान विकसित होने की 82% संभावना है, जो पिछले महीने के 61% अनुमान से काफी बढ़ गई है। यह स्थिति पूरे मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है और दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक 96% संभावना के साथ जारी रहने की आशंका है। NOAA के मुताबिक, प्रशांत महासागर का तापमान इस समय सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक है, जो अल-नीनो के विकास का स्पष्ट संकेत है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अल-नीनो का सीधा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश पर पड़ेगा। IMD ने पहले ही 2026 के मानसून के लिए 92% of Long Period Average (LPA) बारिश का अनुमान जारी किया है, जो सामान्य से कम है।


अल-नीनो क्या है और कैसे प्रभावित करता है..
अल-नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर का पूर्वी और मध्य भाग असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे हवाओं का पैटर्न बदलता है और भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।


परिणाम..
A.भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में कम बारिश तथा भीषण गर्मी।
B.इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में सूखा तथा जंगलों में आग का खतरा।
C.मध्य प्रशांत क्षेत्र में भारी बारिश और चक्रवात।

भारत के कौन से इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में..
उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित होने वाले हैं। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान अगस्त-सितंबर में सबसे संवेदनशील रहेंगे। मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से काफी कम बारिश होने का अनुमान है। खरीफ फसल (धान, मक्का, सोयाबीन आदि) पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे कृषि उत्पादन, जल संकट और किसानों की आय प्रभावित होगी। हालांकि लद्दाख, राजस्थान के कुछ हिस्से, तेलंगाना और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

वैश्विक और दीर्घकालिक चिंता..
Nature जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में कुल बारिश बढ़ रही है, लेकिन यह असमान रूप से और तीव्र bursts में हो रही है। लंबे सूखे के अंतराल (dry spells) के कारण मिट्टी नमी सोख नहीं पाती और जल संकट बढ़ जाता है।
अल-नीनो के साथ जलवायु परिवर्तन का संयोजन स्थिति को और बदतर बना रहा है। पिछले अल-नीनो वर्षों (जैसे 2009) में भारत में बारिश 78% LPA तक गिर गई थी, जिससे भारी सूखा पड़ा था।

सरकार और IMD की तैयारियां..
IMD ने राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन, फसल बीमा और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अल-नीनो मजबूत रहा तो जून-जुलाई के शुरुआती दौर में बारिश ठीक रह सकती है, लेकिन अगस्त-सितंबर में कमी ज्यादा हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञों की चिंता..
60% से ज्यादा भारतीय किसान मानसून पर निर्भर हैं। कम बारिश से खाद्यान्न उत्पादन घट सकता है, जिससे मुद्रास्फीति और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ेगा।

क्या है समाधान..
1.जल संरक्षण अभियान तेज करना।
2.सूखा-प्रतिरोधी फसलें (जैसे बाजरा, ज्वार) को बढ़ावा।
3.माइक्रो इरिगेशन और वाटरशेड मैनेजमेंट।
4.वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना।

2026 का मानसून भारत के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। अल-नीनो की मजबूत वापसी के साथ सूखा, भीषण गर्मी और कृषि संकट की आशंका अब वास्तविकता के करीब है। IMD और NOAA के नवीनतम अपडेट्स पर नजर रखना जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकारों को अभी से तैयारी करनी होगी ताकि संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।