CM ने IAS मनीष सिंह पर जताया भरोसा, दूसरी बार बने जनसंपर्क आयुक्त, परिवहन विभाग की भी जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर मनीष सिंह को जनसंर्पक आयुक्त नियुक्त किया है। नवागत आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास पर सौजन्य भेंट की।

CM ने IAS मनीष सिंह पर जताया भरोसा, दूसरी बार बने जनसंपर्क आयुक्त, परिवहन विभाग की भी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर भरोसा जताया है 2009 बैच के तेज-तर्रार IAS अधिकारी मनीष सिंह पर. उन्हें जनसंपर्क आयुक्त की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. साथ ही परिवहन सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है. यह दूसरी बार है जब मनीष सिंह जनसंपर्क आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. साल 2023 में भी उन्हें इसी पद पर नियुक्त किया गया था.

आपको बता दें कि, सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने वाला विभाग जनसंपर्क.  ऐसे में इस पद पर अनुभव और रणनीतिक सोच बेहद अहम मानी जाती है और यही वजह है कि एक बार फिर सरकार ने अनुभवी अधिकारी पर दांव खेला है. 

मध्यप्रदेश कैडर के 2009 बैच के IAS अधिकारी मनीष सिंह को परिवार से भी प्रशासनिक अनुभव मिला. दरअसल इनके पिता IAS अफसर स्वर्गीय मोती सिंह भोपाल कलेक्टर थे. इसके साथ ही इनके ससुर स्वर्गीय अवधेश नारायण सिंह मध्यप्रदेश के डीजीपी थे.

मनीष सिंह प्रशासनिक करियर

मनीष सिंह ने भोपाल में मैनिट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अगर उनके प्रशासनिक करियर की बात करें. तो सबसे बड़ी पहचान जुड़ी है इंदौर से. इंदौर में निगम कमिश्नर रहते हुए इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने में उनकी अहम भूमिका रही. जनभागीदारी मॉडल सख्त मॉनिटरिंग और व्यवहार परिवर्तन अभियान.

इन सबके जरिए इंदौर ने स्वच्छता में नया रिकॉर्ड बनाया और इसी उपलब्धि के लिए उन्हें Prime Minister Excellence Award से सम्मानित किया गया. यह सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं बल्कि प्रशासनिक दक्षता की राष्ट्रीय पहचान थी. मनीष सिंह भोपाल में SDM रह चुके हैं. साथ ही भोपाल नगर निगम के कमिश्नर भी रहे. उज्जैन और इंदौर जैसे बड़े जिले में कलेक्टर के रूप में कार्य किया. 

दो अहम विभाग एक ही अधिकारी को क्यों?

दरअसल जनसंपर्क और परिवहन दोनों ही सीधे जनता से जुड़े विभाग हैं. एक सरकार की छवि बनाता है तो दूसरा आम नागरिक के रोजमर्रा जीवन से जुड़ा है.ऐसे में सरकार एक भरोसेमंद और परिणाम देने वाले अधिकारी पर भरोसा जताया है.

एक ओर जहां जनसंपर्क विभाग में चुनौती होगी.

सरकारी योजनाओं की प्रभावी ब्रांडिंग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति और सकारात्मक नैरेटिव को मजबूती देना. जबकि, परिवहन विभाग में राजस्व सुधार,सड़क, सुरक्षा और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे मुद्दे अहम रहेंगे. कुल मिलाकर मनीष सिंह की दोबारा ताजपोशी ये संकेत देती है कि सरकार प्रशासनिक अनुभव और परिणाम देने की क्षमता को प्राथमिकता दे रही है.