CM-सीएस की सख्ती के बाद सोम डिस्टलरीज की कंपनियों के लाइसेंस निरस्त
शराब कारोबारी सोम ग्रुप की दो शराब फैक्ट्रियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई इंदौर जिले के देपालपुर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा 23 दिसंबर 2023 को सोम ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ दिए गए फैसले के परिपालन में जारी किया गया है।
नकली और अवैध शराब के परिवहन पर बड़ी कार्रवाई
सरकार ने दायर की केविएट
भोपाल: शराब कारोबारी सोम ग्रुप की दो शराब फैक्ट्रियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई इंदौर जिले के देपालपुर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा 23 दिसंबर 2023 को सोम ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ दिए गए फैसले के परिपालन में जारी किया गया है। फर्जी परमिटों के जरिए नकली शराब परिवहन मामले में न्यायालय ने अपना फैसला दिया था। न्यायालय के फैसले के बाद आबकारी विभाग की महिला उप निरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितंबर 2025 को पद से बर्खास्त किया गया है। तीन जनवरी 2026 को कैबिनेट में तत्कालीन सहायक जिला आबकारी अधिकारी मदन सिंह पंवार, तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी कैलाश चंद्र बंगाली एवं तत्कालीन आबकारी उपनिरीक्षक राम प्रसाद मिश्रा की पेंशन रोकने का प्रस्ताव विभाग द्वारा लाया गया। आबकारी विभाग के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन ने आबकारी विभाग के अधिकारियों से पूछा कि न्यायालय के जिस आदेश के तहत सेवानिवृत्त तीन अधिकारियों की पेंशन रोकने का प्रस्ताव लाए हैं, उस फैसले का परिपालन शराब कंपनी पर हुआ कि नहीं।
इसके बाद चार जनवरी को मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड, सेहतगंज तथा मेसर्स सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक जिला रायसेन के लाइसेंस निरस्त करने के आदेश आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने जारी किए। आयुक्त के आदेश के खिलाफ सोम ग्रुप हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन सरकार ने कैविएट दायर कर दी है। आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल का कहना है कि मामले में सरकार ठोस कार्रवाई कर रही है। आगे और भी जो मामले आएंगे, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
कितनी फर्जी परमिट का किया था उपयोग
आबाकारी आयुक्त के आदेश के अनुसार आरोपियों ने परमिट क्रमांक 10363, ट्रक (एमपी-09-एचएफ-5185) की बिल्टी और अनेकोनेक परमिट बुक कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग में लिया गया है। आरोपी मदन सिंह द्वारा 5 फर्जी परमिट बुक, वीरेंद्र भारद्वाज द्वारा 272, रामप्रसाद मिश्रा द्वारा 25, प्रीति गायकवाड़ द्वारा 279, संजय गोहे द्वारा 282, कैलाश बंगाली द्वारा 29, मोहन सिंह तोमर ने 676, उमाशंकर ने 75, दिनकर सिंह द्वारा 65 फर्जी परमिट तैयार करने के बाद रोजराचक से दीव के लिए परिवहन किया गया था।
कंपनी पर आखिर किसकी मेहरबानी
सोम ग्रुप का रसूख लंबे समय से चला आ रहा है। वर्ष 2011 में इंदौर जिले की बेटमा थाना पुलिस ने एक ट्रक शराब पकड़ी थी। तत्कालीन इंदौर एसएसपी ए साईं मनोहर के निर्देश पर एसपी डी श्रीनिवास वर्मा के मार्गदर्शन में तत्कालीन थाना प्रभारी दिलराज सिंह बघेल ने जब मामले की विवेचना की तो तब पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया था। बताया जाता है कि उस समय भी पुलिस पर भारी राजनैतिक और प्रशासनिक दबाव था। सोम ग्रुप का रसूख कभी कम नहीं हुआ। इसका ताजा उदाहरण भोपाल जिले में चल रहे शराब के ठेके हैं। इस समूह के पास भोपाल की 70 प्रतिशत शराब दुकानों का ठेका है। कंपनी की मोनोपाली है कि वह अपनी दुकानों पर अपनी ही कंपनी की शराब बेचेगा। दूसरी डिस्टलरीज की शराब सोम समूह की दुकानों पर नहीं बेची जाती। भोपाल का आबकारी और पुलिस अमला शिकायतों के बाद ही इस कंपनी के गुर्गों पर कोई कार्रवाई नहीं करता। कंपनी के गुर्गे स्वयं बार और अन्य स्थानों पर जांच करते हैं और दबाव बनाते हैं कि उनकी ही कंपनी की शराब बेची जाए। दूसरी कंपनी की शराब बेचने पर मारपीट भी की जाती है, लेकिन पुलिस और आबकारी अमला कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
महाधिवक्ता के अभिमत के बाद भी नहीं निकला था आदेश
फर्जी परमिट के जरिए नकली शराब के परिवहन करने के मामले में 23 दिसंबर 2023 को देपालपुर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया था। फैसले में सोम ग्रुप की कंपनी के प्रतिनिधि व अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता उमाशंकर शर्मा, जीडी अरोरा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर व दीनानाथ सिंह तथा अन्य को कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया था। फैसले के खिलाफ सोम समूह ने उच्च न्यायालय में अपील की और कहा कि विभाग को भेजे अपने जवाब में कहा कि उच्च न्यायालय ने देपालपुर अदालत के फैसले पर स्थगन दिया है। इसके बाद आबकारी विभाग ने मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता से मामले में कार्रवाई के लिए अभिमत मांगा था। 24 दिसंबर 2025 को महाधिवक्ता ने अपने अभिमत में लिखा कि उच्च न्यायालय ने आरोपियों की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है, लेकिन दोष सिद्ध अभी भी प्रभावी है। इसके बाद भी सोम ग्रुप की दोनों शराब कंपनियों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। कैबिनेट की बैठक में सीएम के पूछने और सख्ती के बाद आनन- फानन में लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में बताया गया है कि धारा 31(1)(क), 31(1)(ग), 31(1)(घ) तथा धारा 44 के प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
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