भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य मंत्रि-परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कृषि, किसान कल्याण, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, सिंचाई, आबकारी नीति और आदिवासी विकास से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए, जो प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।
कैबिनेट ने निर्णय लिया कि अगली कृषि कैबिनेट बैठक बालाघाट में आयोजित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए यह तय किया गया कि जहां-जहां चिड़ियाघर स्थापित किए जाएंगे, वहां घायल पशुओं के उपचार हेतु रेस्क्यू सेंटर भी बनाए जाएंगे, ताकि उन्हें स्वस्थ होने तक सुरक्षित रखा जा सके।
किसानों के हित में गेहूं पंजीयन की अवधि 7 फरवरी से 7 मार्च तक निर्धारित की गई है। वर्ष 2026–27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित ₹2585 प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में ₹160 अधिक है। समर्थन मूल्य पर विक्रय की राशि किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में प्राथमिकता के आधार पर सीधे भुगतान की जाएगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में मध्य प्रदेश टीबी उन्मूलन में देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हो गया है। साथ ही सिकल सेल रोग के लिए व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाएं विकसित की गई हैं। सांस्कृतिक दृष्टि से गुड़ी पड़वा पर्व को पूरे प्रदेश में उत्साहपूर्वक मनाने का निर्णय भी लिया गया है।
सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए नई पेंशन योजना में तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है। वहीं उच्च न्यायालय में कंप्यूटर ऑपरेटर सहित संबंधित संवर्गों की आयु सीमा में 5 वर्ष की वृद्धि कर इसे 45 वर्ष कर दिया गया है। इसके अलावा आहार अनुदान योजना, एकीकृत छात्रावास योजना और सीएम राइज स्कूल सहित सभी प्रमुख योजनाओं की निरंतरता को स्वीकृति प्रदान की गई है।
बैठक के बाद MSME मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि कैबिनेट ने नर्मदा घाटी परियोजना से प्रभावित धार, बड़वानी और अलीराजपुर जिलों के 25,602 आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री निःशुल्क करने का निर्णय लिया है, जिस पर लगभग 600 करोड़ रुपये का व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही कटनी और मैहर जिलों के लिए 620.65 करोड़ रुपये की धनवाही और बरही सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट ने नई आबकारी नीति 2026–27 को भी हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत लगभग 19,000 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा गया है। नीति में पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध शराब पर नियंत्रण के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा राज्य समाज कल्याण मंडल को भंग कर उसके कर्मचारियों का महिला एवं बाल विकास विभाग में संविलियन करने का निर्णय लिया गया है।
यह बैठक इसलिए भी अहम रही क्योंकि राज्य का बजट 18 फरवरी 2026 को पेश किया जाना है। कैबिनेट में बजट के स्वरूप और नए नवाचारों पर चर्चा की गई। सरकार का फोकस ‘कृषि उद्योग’ और ‘रोजगार सृजन’ पर रहेगा, जिसके लिए विशेष फंड की व्यवस्था की जा रही है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने महाकाल लोक की तर्ज पर मंदसौर में ‘पशुपतिनाथ लोक’ के विकास और प्रदेश में पहली बार आयोजित होने वाले ‘पुष्प महोत्सव’ की जानकारी भी मंत्रियों को दी। कुल मिलाकर, यह कैबिनेट बैठक बजट सत्र से पहले विकास, किसान कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।