महाशिवरात्रि पर बिरसिंहपुर में बाबा गैबीनाथ महादेव की शाही सवारी

बिरसिंहपुर के गैबीनाथ धाम में महाशिवरात्रि के पूर्व महादेव की भव्य शाही सवारी नगर भ्रमण पर निकाली गई, जिसमें भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

महाशिवरात्रि पर बिरसिंहपुर में बाबा गैबीनाथ महादेव की शाही सवारी
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सतना। जिले के बिरसिंहपुर में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक ऐसा शिवालय है, जहां खंडित शिवलिंग का अभिषेक कर श्रद्धालु महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं। महाशिवरात्रि के पूर्व शनिवार को बिरसिंहपुर स्थित गैबीनाथ धाम में शिवलिंग के रूप में विराजे महादेव की शाही सवारी निकाली गई। इससे पूर्व महादेव को हल्दी अर्पित की गई तथा चंदन-भस्म और फूल-मालाओं से उनका श्रृंगार किया गया। महादेव रथ पर विराजमान हुए और देवाधिदेव की शाही सवारी नगर भ्रमण पर निकली।

ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण पर निकले भोलेनाथ के दर्शन-पूजन कर जगह-जगह भक्तों ने आरती उतारी। बिरसिंहपुर नगर के युवाओं और भक्तों की टोलियां नाचते-गाते, अबीर-गुलाल उड़ाते हुए शाही सवारी के साथ चल रही थीं। शोभायात्रा में महादेव की सजीव झांकियां भी शामिल थीं। भोलेनाथ का वेश धारण किए भक्त हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए नृत्य कर रहे थे। बिरसिंहपुर नवयुवक मंडल के श्रीकांत त्रिपाठी ने बताया कि भगवान गैबीनाथ की शाही सवारी नगर भ्रमण करते हुए माता पार्वती के मंदिर पहुंची, जहां रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव-पार्वती विवाह का विधान पूर्ण कराया जाएगा।

औरंगजेब ने करवाया था शिवलिंग खंडित

सतना जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर बिरसिंहपुर स्थित गैबीनाथ धाम में यूं तो प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन शिवरात्रि पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। सिर्फ सतना जिले ही नहीं, आसपास के अन्य स्थानों से भी लोग गैबीनाथ महादेव का जलाभिषेक कर अपनी आस्था के फूल समर्पित करने पहुंचते हैं। बिरसिंहपुर में कुंड के एक छोर पर महादेव विराजमान हैं तो सामने दूसरे छोर पर माता पार्वती प्रतिष्ठित हैं। मान्यता है कि जलाभिषेक से प्रसन्न होकर महादेव मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं।

इस शिवालय की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां खंडित शिवलिंग की पूजा होती है। मान्यता के अनुसार, शिवलिंग को मुगल शासक औरंगजेब ने सोना और खजाना प्राप्त करने के लालच में खंडित करवाया था। कहा जाता है कि उसने शिवलिंग पर प्रहार करवाए थे।