रीवा के गौरव डॉ. माधव सिंह बघेल जिन्होंने आयुर्वेद का परचम पूरी दुनिया में लहराया

डॉ. (प्रोफेसर) माधव सिंह बघेल रीवा के फेमस आयुर्वेद स्पेशलिस्ट, जिन्होंने दुनिया में आयुर्वेद का नाम रोशन किया। हंगरी की डेब्रेसेन यूनिवर्सिटी में आयुर्वेद चेयर के चेयरमैन के तौर में काम करते हुए उन्होंने ग्लोबल लेवल पर आयुर्वेद को पहचान दिलाई।

रीवा के गौरव डॉ. माधव सिंह बघेल जिन्होंने आयुर्वेद का परचम पूरी दुनिया में लहराया

रीवा के रहने वाले डॉ. (प्रोफेसर) माधव सिंह बघेल सिर्फ एक बड़े आयुर्वेद स्कॉलर ही नहीं थे, बल्कि शहर और देश का गर्व थे। जनवरी 2021 में उनके निधन के बाद भी उनके काम और सोच आज भी लोगों को इंस्पायर कर रही है।

उनके नाम पर गोल्ड मेडल

जयपुर स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेदा के स्थापना दिवस पर जब टॉपर स्टूडेंट्स  को “डॉ. माधव सिंह बघेल अवॉर्ड” दिया गया, वो बेहद इमोशनल मोमेंट था।

हंगरी में मिला सम्मान

हंगरी की डेब्रेसेन यूनिवर्सिटी में उनके सम्मान में मेमोरियल प्लाक का इनॉग्रेशन किया गया। जहां वो 2014-15 में आयुर्वेद से चेयरमैन रहे । ये चेयर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा स्थापित की गई थी। इससे साफ है कि उन्होंने आयुर्वेद को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई। उस प्रोग्राम में हंगरी में भारत के राजदूत अंशुमान गौर को भी इन्वाइट किया गया था। 

टीचिंग और लंबा एक्सपीरियंस 

डॉ. बघेल ने लखनऊ के स्टेट आयुर्वेद कॉलेज से ग्रेजुएशन और गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। उन्हें 33 साल से ज्यादा का टीचिंग एक्सपीरियंस था। उन्होंने लेक्चरर, रीडर, प्रोफेसर और बाद में डायरेक्टर जैसी पोस्ट पर भी काम किया। वो फिजियोथेरेपी और पंचकर्म में स्पेशलिस्ट थे।

उन्होंने 21 PHD और 71 से ज्यादा रेसर्चेज को गाइड किया। 135 से ज्यादा रिसर्च पेपर्स पब्लिश किए और 6 किताबें लिखीं। उनकी बुक “विकृति एवं रोग विज्ञान” सबसे फेमस है। 

फर्जी आयुर्वेद कॉलेजों पर कार्रवाई

डॉ. बघेल के भाई भगवत सिंह बघेल ने बताया कि देश में चल रहे फर्जी आयुर्वेद कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन्हें सेन्ट्रल गवर्मेंट की तरफ से खास जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी रिपोर्ट के बेसिस पर करीब 250 फर्जी कॉलेज बंद कराए गए। ये आयुर्वेद शिक्षा की क्वालिटी सुधारने के लिए एक बड़ा कदम था।

उनके नाम पर सम्मान और गोल्ड मेडल

  • जयपुर में उनके नाम पर लेक्चर हॉल और गोल्ड मेडल।
  • जामनगर में गोल्ड मेडल।
  • नेपाल के जनकपुर में भी उनके नाम पर सम्मान।
  • हंगरी की डेब्रेसेन यूनिवर्सिटी में मेमोरियल प्लाक

उन्हें देश-विदेश में प्रोफेसर, HOD और डीन को अपॉइंट करने के लिए खास तौर पर बुलाया जाता था। वो स्पेशल लेक्चर्स देने के लिए भी इन्वाइट किए जाते थे।

कैसे इंसान थे डॉ. बघेल?

उनके भाई के मुताबिक, वे बहुत शांत नेचर के, जमीन से जुड़े और बेहद विनम्र इंसान थे। इतनी ऊंची अचीवमेंट्स के बाद भी उनमें कभी घमंड नहीं आया। वो खुद अपनी अचीवमेंट्स की चर्चा नहीं करते थे एक तरह से डॉक्टर बघेल इंट्रोवर्ट थे। सबकी मदद करना उनकी आदत थी।

आज भी जिंदा है उनकी विरासत

भले ही 2021 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका काम, उनके विचार और आयुर्वेद के लिए उनका योगदान आज भी जिन्दा है। रीवा के लिए वो हमेशा गर्व का विषय रहेंगे और आयुर्वेद जगत में उनका नाम सम्मान से लिया जाता रहेगा।