CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SC में याचिका : SIR के फैसलों और 13 करोड़ वोटरों की जांच की मांग
Petition against Gyanesh Kumar : सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। याचिका में SIR से जुड़े फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने, जांच के लिए SIT बनाने सहित कई मांग की गई है।
Petition against Gyanesh Kumar : नई दिल्ली। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के आधार पर दाखिल हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एसआईआर से जुड़े कई फैसले दूसरे दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
याचिका में क्या मांग की गई
याचिका में इन फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की गई है। साथ ही पुराने फॉर्म 6 को बहाल करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के तरीके की जांच के लिए एसआईटी बनाने की मांग की है।
याचिका में सीईसी ज्ञानेश कुमार के अलावा मनीष गर्ग आईएएस और चुनाव आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अधिकारियों ने जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत तय जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया।
आयोग के अंदर मतभेद का जिक्र
याचिका में कहा गया है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के अंदर भी मतभेद सामने आए थे। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिकाएं
महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही चुनाव आयोग के अंदर मतभेद का भी जिक्र किया गया है।
कोल्हापुर बेंच में तीन स्थानीय निवासियों ने वकील असीम सरोदे की टीम के जरिए याचिका दाखिल की है। इसमें सीईसी ज्ञानेश कुमार के 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इनमें वोटर हटाने, डेटाबेस एक्सेस, सॉफ्टवेयर में रुकावट और जुलाई में फॉर्म 6 में किए गए बदलाव शामिल हैं। याचिका में इसे सीईसी एंड अदर ईसीज एक्ट 2023 की धारा 18 का उल्लंघन बताया गया है।
मुंबई बेंच में दूसरी याचिका
मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य निवासी ने दूसरी याचिका दाखिल की है। इसे वकील हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी पेश कर रहे हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एडीआर फैसले का हवाला दिया गया है।
इसमें दावा किया गया है कि बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर पहचान पत्र मांग रहे हैं। जो वोटर घर पर नहीं मिले उन्हें बिना सुनवाई या लिखित आदेश के गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट कैटेगरी में डाल दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका मकसद चुनाव रोकना नहीं है। वे सिर्फ कानून के मुताबिक एसआईआर की प्रक्रिया चाहते हैं। दोनों याचिकाओं में हटाए गए वोटरों के नाम वापस जोड़ने की मांग की गई है। महाराष्ट्र में एसआईआर पर रोक लगाने और रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग भी की गई है।

