धीरेंद्र शास्त्री पर फिर भड़के अखिलेश यादव: विवाद नहीं ले रहा थमने का नाम, बोले- ब्रज और अवध में नहीं मिलेगा प्रवेश
धीरेंद्र शास्त्री और अखिलेश यादव के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयानों पर अखिलेश यादव ने एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को न ब्रज में स्वागत मिलेगा और न अवध में। जानिए क्या है पूरा विवाद और यूपी-एमपी बॉर्डर पर नाकाबंदी को लेकर उन्होंने क्या कहा।
लखनऊ। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयानों से शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। अखिलेश यादव ने बुधवार (4 नवंबर 2026) को एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों की भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उनका न तो ब्रज में स्वागत होगा और न ही अवध में।
अखिलेश यादव की एक पोस्ट ने फिर गरमाया विवाद
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धीरेंद्र शास्त्री का नाम लिए बिना निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि संबंधित व्यक्ति ने यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की भावनाएं आहत की हैं। अब न कोई सच्चा रघुवंशी उनका स्वागत करेगा और न ही सच्चा यदुवंशी।
इन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत की हैं। अब इन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में। अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी। उप्र-मप्र के बार्डर पर इनकी नाकाबंदी का बोर्ड लग जाना चाहिए, जिस पर लिखा हो : ‘ईशनिंदा’ करनेवालों का उप्र की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है। जिसने धर्म-मज़हब नहीं छोड़ा वो अगली बार सम्प्रदायों पर छींटाकशी करने से बाज़ नहीं आयेगा। समझाने की ज़रूरत नहीं अगला नंबर किस का है। नेपाल बार्डर भी बंद करना पड़ेगा नहीं तो उधर से इधर आना ज़्यादा पास पड़ेगा। लगता है उप्र में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक-धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है। आपस की टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 4, 2026
सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकाबंदी का बोर्ड लगाने की बात भी कही। उन्होंने सुझाव दिया कि बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि ईशनिंदा करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि में प्रवेश वर्जित है। नेपाल सीमा का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आपसी राजनीतिक टकराव में भगवान को क्यों लाया जा रहा है।
अखिलेश ने आशंका जताई कि उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने की कोशिश हो रही है। उनके इस बयान ने पहले से चल रहे विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर क्या बोले थे धीरेंद्र शास्त्री?
इस पूरे विवाद की जड़ मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणियां हैं। कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए राम के सीधे खड़े होने और श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का उल्लेख किया था।
धीरेन्द्र शास्त्री.... सीधे सीधे वोटों के ध्रुवीकरण के लिए लिए भगवान कृष्ण को यादवों से जोड़कर दिखाना चाहता है और भगवान राम को एक पार्टी विशेष से...... तय जनता को करना है...... जो लोग समाज में इंसानों को जातियों और पंथों में बांटते नहीं थकते, वे अब ईश्वर के स्वरूपों में भी ऊंच-नीच और भेद तलाशने लगे हैं!..... भगवान श्री राम और श्री कृष्ण दोनों ही एक चेतना के अभिन्न रूप हैं, लेकिन मंच से ऐसे पाखंडी कभी 'सीधे' तो कभी 'टेढ़े' के नाम पर आराध्यों का उपहास उड़ाकर तालियां बटोर रहे हैं....... इस पूरे विमर्श के पीछे वही भाजपाई और संघी मानसिकता साफ दिखती है, जो इस लोक में वोटों के लिए इंसानों को जातियों और मजहबों में बाँटती है, और रील वाले बाबाओं को, दूसरे लोक में देवताओं के बीच दरार पैदा करने के लिए, छोटा भाई, बड़ा भाई बनाकर रखती है..... यह वही विभाजनकारी और संकीर्ण मानसिकता का विस्तार है, जो समाज को जोड़ने के बजाय केवल तुलना, भेद और ध्रुवीकरण के सहारे अपनी सियासत की दुकान चमकाना जानती है, आस्था को विभाजन का औजार बनाकर ही जो सत्ता में आए हों, उनसे कोई और अपेक्षा हो भी नहीं सकती.......
— Jainendra Pratap Singh Rathore (@jpsingh1982) November 2, 2026
उनकी इन टिप्पणियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ब्रज क्षेत्र के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि दोनों भगवान अपने-अपने स्वरूप में पूजनीय हैं और उनकी तुलना को लेकर की गई टिप्पणियां धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती हैं। इसके बाद अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
माफी मांगने के बाद भी क्यों नहीं थम रहा विवाद?
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने केन्या के नैरोबी से सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर सफाई दी थी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच कोई अंतर बताना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। यदि उनके शब्दों से किसी को दुख पहुंचा है तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी को लेकर विवाद के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने माफी मांगते हुए सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान कृष्ण का अपमान करना नहीं था और बात भावावेश में कही गई। अब सवाल उठ रहा है—क्या ऐसी टिप्पणी के बाद माफी को ही पर्याप्त माना जाए? https://t.co/dAdQWmVixi
— Public Vani News (@publicvaninews) November 2, 2026
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। 3 नवंबर को अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री का एक अन्य वीडियो भी साझा किया, जिसमें वे भगवान राम के पांच पिता होने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वह भगवान श्रीराम के ‘पांच पिता’ होने की बात कहते नजर आ रहे हैं। बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, वीडियो के पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है। https://t.co/4rWYCpmizS
— Public Vani News (@publicvaninews) November 3, 2026
इस वीडियो में शास्त्री ने अग्निदेव, राजा दशरथ, जटायु, ऋषि विश्वामित्र और राजा जनक का अलग-अलग संदर्भों में उल्लेख किया था। अखिलेश ने इस टिप्पणी पर भी सवाल उठाए और उनके कार्यक्रम रद्द करने की मांग की। NDTV की पड़ताल के मुताबिक, यह वीडियो करीब चार साल पुराना है।
अब प्रतापगढ़ की कथा पर भी टिकी नजरें, क्या बढ़ेगा सियासी विवाद?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच धीरेंद्र शास्त्री का उत्तर प्रदेश दौरा भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 17 नवंबर से प्रतापगढ़ में उनकी कथा प्रस्तावित है, जिसका आयोजन राजा भैया की ओर से कराया जा रहा है। अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद इस कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं। हालांकि, यूपी-एमपी सीमा पर नाकाबंदी की बात फिलहाल अखिलेश की राजनीतिक टिप्पणी है, किसी सरकारी आदेश या आधिकारिक प्रतिबंध की घोषणा नहीं। फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बावजूद विवाद थमता नहीं दिख रहा है। एक तरफ धार्मिक भावनाओं को लेकर आपत्तियां उठ रही हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अखिलेश यादव के ताजा हमले पर धीरेंद्र शास्त्री क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा।

