बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में घोटाला: बिना हाजिरी वेतन दिए जाने पर सवाल, RTI से हुआ खुलासा

भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में 1988 से 2023 के बीच करीब 275 करोड़ रुपये वेतन भुगतान पर सवाल उठे हैं। RTI में हाजिरी रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई।

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में घोटाला: बिना हाजिरी वेतन दिए जाने पर सवाल, RTI से हुआ खुलासा

Barkatullah University Scam : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में वेतन भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि साल 1988 से 2023 के बीच कर्मचारियों को बिना हाजिरी के वेतन दिया गया। इस दौरान करीब 275 करोड़ रुपये वेतन के रूप में बांटे गए। मामले का खुलासा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी से हुआ है।

बताया गया है कि यूनिवर्सिटी के पास इस अवधि का हाजिरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। साथ ही, यूनिवर्सिटी यह भी साफ नहीं कर पाई कि कर्मचारियों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज या जांची जाती थी। ऐसे में वेतन भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

35 साल तक हाजिरी में गड़बड़ी का मामला दर्ज नहीं

मिली जानकारी के अनुसार, साल 1988 से 2023 तक हाजिरी में गड़बड़ी का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। इस दौरान यूनिवर्सिटी में शिक्षकों और विभागों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई।

शुरुआत में यहां शिक्षण स्टाफ के पांच सदस्य थे। बाद में विभागों की संख्या बढ़कर 20 हो गई। इनमें 40 शिक्षक काम कर रहे हैं। इसके अलावा 21 संविदा शिक्षक और करीब 250 गेस्ट फैकल्टी भी पढ़ाते हैं। फिलहाल यूनिवर्सिटी का सालाना खर्च करीब 13 करोड़ रुपये बताया गया है।

पूर्व छात्र ने RTI से मांगी जानकारी

इस मामले को पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह ने RTI के जरिए उठाया। उन्होंने यूनिवर्सिटी से कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

उनका सवाल था कि अगर कर्मचारियों की हाजिरी का रिकॉर्ड नहीं है, तो उनका वेतन किस आधार पर जारी किया गया। लेकिन यूनिवर्सिटी की ओर से इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। यह भी साफ नहीं किया गया कि कर्मचारियों की मौजूदगी की जांच किस तरीके से होती थी।

वेतन बिलों की जांच की मांग

पूर्व छात्र ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि वेतन बिल किसने तैयार किए और किस अधिकारी ने उन्हें मंजूरी दी। इसके साथ ही भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एसबी सिंह ने इस मामले पर कहा है कि ये घटनाएं उनके कार्यकाल से पहले की हैं।

275 करोड़ के भुगतान पर उठे सवाल

मामले में करीब 275 करोड़ रुपये के वेतन भुगतान का जिक्र है। वहीं, पूर्व छात्र ने करीब 250 करोड़ रुपये के भुगतान के आधार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस रकम का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए।

जांच में यह देखना जरूरी होगा कि वेतन बिल कैसे तैयार किए गए, किस अधिकारी ने उन्हें प्रमाणित किया और भुगतान से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई।

जांच में इन रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी

पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए हाजिरी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करनी होगी। इसके अलावा विभागों के दस्तावेज, कक्षाओं से जुड़ी जानकारी, छुट्टी के आवेदन, विभागीय रिपोर्ट और वेतन बिल भी देखे जाने चाहिए।

इन दस्तावेजों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कर्मचारी वास्तव में काम कर रहे थे या नहीं और उन्हें किस आधार पर वेतन दिया गया।

1970 में हुई थी यूनिवर्सिटी की शुरुआत

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की शुरुआत साल 1970 में भोपाल यूनिवर्सिटी के नाम से हुई थी। साल 1988 में इसका नाम बदलकर बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी कर दिया गया। यह मध्य प्रदेश के आठ जिलों में उच्च शिक्षा से जुड़ा प्रमुख संस्थान है।

साल 2025 में यूनिवर्सिटी को NAAC से A ग्रेड भी मिला था। ऐसे में वेतन भुगतान और हाजिरी रिकॉर्ड को लेकर उठे सवाल अहम हैं। अब जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान किस आधार पर किया गया और रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं हैं।