Bhopal में कचरे का अंबार- पानी बंद की चेतावनी : विदिशा में MLA ने उठाई झाड़ू, कांग्रेस बोली- MP में सीवर सफाई से 8 मौतें सरकार चुप
Bhopal Garbage Crisis : दिवाली से पहले भोपाल में 10 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं। 400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी हैं और सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। कर्मचारियों ने पानी सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है।
Bhopal Garbage Crisis : भोपाल। दिवाली से पहले मध्य प्रदेश के कई शहरों में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। राजधानी भोपाल में लगातार दूसरे दिन भी सड़कों, बाजारों और गली-मोहल्लों में कचरे के ढेर नजर आए। कई इलाकों में डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों पर फैल रहा है। अब कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी भी दी है। इससे राजधानी में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
रोज निकलता है 850 टन कचरा
भोपाल में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए 400 से ज्यादा गाड़ियां तैनात हैं। ये गाड़ियां रोज दो से तीन चक्कर लगाती हैं। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों से कचरा कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी भेजा जाता है। राजधानी में रोज करीब 850 टन कचरा निकलता है। हड़ताल के कारण कचरा उठाने और निस्तारण केंद्र तक पहुंचाने का काम प्रभावित हुआ है। 10 हजार से ज्यादा सफाईकर्मियों के आंदोलन में शामिल होने से व्यवस्था पर असर पड़ा है।
नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन, बातचीत भी बेनतीजा
कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। इससे पहले मंगलवार को कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की कोशिश की थी। अधिकारियों के नहीं पहुंचने से नाराज कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बनाई, लेकिन पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। बुधवार को यूनियन पदाधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे से मुलाकात की, लेकिन बातचीत में कोई समाधान नहीं निकला।
सफाईकर्मियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारी सरकारी कर्मचारी का दर्जा, पति या पत्नी की मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति, न्यूनतम 25 हजार रुपये वेतन और ठेका व्यवस्था खत्म कर स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। सफाई यूनियन के प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान ने कहा कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
लोगों ने कचरा जलाना शुरू किया, विधायक ने खुद लगाई झाड़ू
कचरा नहीं उठने से कुछ इलाकों में लोग और व्यापारी कचरा जलाकर नष्ट कर रहे हैं। चूना भट्टी सहित कई स्थानों पर कचरे में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, विदिशा जिले के सिरोंज में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने पर विधायक उमाकांत शर्मा ने बुधवार रात करीब दो घंटे तक खुद झाड़ू लगाई। भोपाल में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने भी कर्मचारियों की मांगों और हड़ताल को लेकर शहर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर कांग्रेस का सरकार पर हमला
सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता ने कहा कि ये वो समाज है जो पूरे शहर और गांव को स्वच्छ रखता है, लेकिन दिवाली के समय भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कचरा गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं, ये पूरे प्रदेश के हाल हैं।
5 घटनाओं में 8 मौतें, सरकार चुप
कांग्रेस नेता ने बताया कि प्रदेश में सीवर सफाई के दौरान 5 घटनाएं घटीं, जिसमें 8 मौतें हुईं और 4 घायल हुए। ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में ड्रेनेज लाइन में उतरने पर दम घुटने से मौत हुई। उज्जैन में तो मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही एक की मौत हुई और दो गंभीर रूप से घायल हुए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सफाई कर्मियों के लिए आज तक कोई नीति नहीं बनाई। मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 की धारा 7 के तहत सफाई कर्मियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने कभी नहीं सोचा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीवर लाइन की सफाई में मौत पर 30 लाख रुपये मिलने चाहिए, लेकिन मप्र सरकार 2 लाख, 3 लाख, 4 लाख देती है और वो भी सभी को नहीं। कई लोगों के नाम हटा दिए जाते हैं ताकि नगर निगम कमिश्नर और सीएमओ पर जवाबदारी न आए।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी नीति नहीं
उन्होंने बताया कि 2025 में जबलपुर हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सफाई कर्मियों के लिए नीति बननी चाहिए। 1 सितंबर 2026 को सरकार डबल बेंच में गई, लेकिन अपील खारिज हो गई। हाईकोर्ट ने कहा कि इनके लिए नीति बने और 10 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे कर्मियों का नियमितीकरण हो।
आउटसोर्स में कमीशनबाजी का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश के हर विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों को रखा जा रहा है और उद्यमिता विकास केंद्र के नाम पर नौकरी रखने के लिए एक-एक व्यक्ति से 40-50 हजार से 1 लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं। कई लोगों ने शपथ के रूप में जानकारी दी है, जिसे विधानसभा में उठाया जाएगा।



