Burhanpur News : आदिवासी गीत पर थिरके सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और विधायक अर्चना चिटनिस, कलेक्टर भी झूमे
Burhanpur News : बुरहानपुर में मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह के दौरान आदिवासी लोकगीत पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, विधायक अर्चना चिटनीस, मंजू दादू, महापौर और कलेक्टर थिरकते नजर आए।
Burhanpur News : मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। आदिवासी लोकगीत पर स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति चल रही थी। तभी कार्यक्रम में मौजूद सांसद, विधायक, महापौर और कलेक्टर खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। सभी मंच के सामने आदिवासी लोकधुन पर कदम मिलाते नजर आए।
दरअसल, 1 नवंबर को मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस के मौके पर बुरहानपुर जिला मुख्यालय में समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों ने आदिवासी लोककला और संस्कृति पर आधारित रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। इसी दौरान एक आदिवासी लोकगीत की प्रस्तुति ने ऐसा माहौल बनाया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी झूम उठे।
बुरहानपुर में MP स्थापना दिवस समारोह के दौरान आदिवासी लोकगीत पर ऐसा रंग जमा कि सांसद, विधायक, महापौर और कलेक्टर भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए। ???????? #MadhyaPradesh #Burhanpur #MPFoundationDay #TribalDance #ViralVideo https://t.co/5rnE4G24q4
— Public Vani News (@publicvaninews) November 1, 2026
इस दौरान खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील (Gyaneshwar Patil), बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनीस (Archana Chitnis), नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू, महापौर माधुरी अतुल पटेल और नवागत कलेक्टर विवेक कुमार थिरके आदिवासी लोकगीत पर नाचते नजर आए। समारोह में मौजूद लोगों ने इस पल को अपने कैमरों में कैद किया।
सांसद ने MP के 70 साल के विकास का किया जिक्र
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में प्रदेश के 70 साल के विकास का जिक्र करते हुए बीजेपी सरकारों के कार्यकाल की तारीफ की।
सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने कहा कि मध्य प्रदेश में 70 साल के दौरान बीजेपी के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जिस गति से विकास हुआ, वैसा विकास गैर बीजेपी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में नहीं हो सका।
समारोह में जहां एक ओर बच्चों ने आदिवासी लोककला के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लोकगीत पर थिरकने का नजारा भी चर्चा का विषय बन गया।

