ई-अटेंडेंस बना मजाक: मोबाइल से हाजिरी लगाकर गायब हो रहे गुरुजी, 15 दिन में 3 बार मिला स्कूल बंद

मऊगंज के खरिका स्कूल में शिक्षा व्यवस्था बदहाल: कागजों में पढ़ाई, स्कूल में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, आजादी के सात दशक बाद भी नहीं बना स्कूल भवन, 500 आबादी की बसाहट में शिक्षा भगवान भरोसे

ई-अटेंडेंस बना मजाक: मोबाइल से हाजिरी लगाकर गायब हो रहे गुरुजी, 15 दिन में 3 बार मिला स्कूल बंद

मऊगंज से राजेंद्र प्यासी की रिपोर्ट।

 मऊगंज जिले में शिक्षा का अधिकार और सरकार की ई-अटेंडेंस जैसी महत्वाकांक्षी योजना जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। ब्लॉक से लेकर जिले तक बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की कागजी मॉनिटरिंग के कारण जनपद शिक्षा केंद्र नईगढ़ी अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक विद्यालय खरिका की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह बदहाल होने के आरोप सामने आए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार इस विद्यालय की कहानी बेहद चिंताजनक है। आरोप है कि यहां पदस्थ शिक्षक समय से समय तक स्कूल में रहते ही नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक गांव की सड़क पर खड़े होकर ही मोबाइल से ई-अटेंडेंस लगा देते हैं और वापस लौट जाते हैं।

शाम को दूसरे समय की हाजिरी भी इसी तरह लगाने की बात कही जा रही है। इससे शासन के पोर्टल पर उपस्थिति तो दर्ज हो रही है, शिक्षकों को प्रतिमा पगार मिल रही है, लेकिन धरातल पर स्कूल सूना पड़ा है।

न भवन-न छात्र, मास्टर साहब ले रहे तनख्वाह

सबसे गंभीर मामला विद्यालय भवन को लेकर है। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के सात दशक बाद भी इस 500 आबादी वाली बसाहट में प्राथमिक विद्यालय का अपना भवन नहीं बन सका है। पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर महज कागजों में स्कूल संचालन की बात कही जाती है, लेकिन मौके पर नियमित पठन-पाठन नहीं हो रहा है।

ऐसे में कक्षा 1 से 5 तक दर्ज बताए जा रहे 8 बच्चों का भविष्य अंधकार में है। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है, जो कागजों में ही चलने की बात सामने आ रही है।

इस मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए पब्लिक वाणी टीम ने 15 दिनों के अंतराल में तीन बार मौके का जायजा लिया, लेकिन हर बार विद्यालय बंद मिला। न शिक्षक मिले, न छात्र। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा - मास्टर साहब आते हैं, हाजिरी लगाकर चले जाते हैं, बच्चों को पढ़ाते कभी नहीं देखा।

कागज में चल रही अधिकारियों की मानिटरिंग 

जब इस संबंध में बीआरसीसी राममणि सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने दूरभाष पर 8 बच्चों के दर्ज होने की बात स्वीकार की, लेकिन विद्यालय संचालित हो रहा है या नहीं, इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

उन्होंने जांच कर उच्च अधिकारियों को प्रतिवेदन भेजने की बात कही। जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल मिश्रा ने दूरभाष पर कहा कि कक्षा 1 से 8 तक की मॉनिटरिंग तथा व्यवस्था बीआरसीसी और डीपीसी के पास है, फिर भी टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। वहीं डीपीसी राजेश तिवारी से कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

सवाल यह है कि आखिर आज तक भवन निर्माण क्यों नहीं हुआ? यदि शिक्षक नियमित वेतन ले रहे हैं तो बच्चों को पढ़ाया क्यों नहीं जा रहा? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि संकुल केंद्र प्रभारी, जन शिक्षक, बीएसी बीआरसीसी, डीपीसी जैसे मॉनिटरिंग अमले की आंखों के सामने यह सब कैसे चल रहा है?

ग्रामीणों और पालकों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर विधि संगत कार्यवाही हो और बसाहट में शीघ्र विद्यालय भवन बनाकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।