MP में बसेंगे 15 नए सैटेलाइट टाउन: शहरी विकास के लिए 2013 करोड़ के MOU, मोहन कैबिनेट से 23,228 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी

MP Cabinet Meeting 2026: मध्य प्रदेश में 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने की तैयारी। शहरी विकास के लिए 2013 करोड़ के MOU, स्वामित्व योजना में 50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य और 23,228 करोड़ की योजनाएं जारी रखने का फैसला।

MP में बसेंगे 15 नए सैटेलाइट टाउन: शहरी विकास के लिए 2013 करोड़ के MOU, मोहन कैबिनेट से 23,228 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी

Mohan Yadav Cabinet: मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए सरकार अब नए शहर बसाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 3 नवंबर को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने की योजना पर चर्चा और शहरी विकास से जुड़े फैसलों को आगे बढ़ाया गया। इससे पहले इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में शहरी विकास के लिए 2,013 करोड़ रुपए के समझौता ज्ञापन (MOU) हुए थे। सरकार का फोकस शहरों का विस्तार करने के साथ उन्हें बेहतर सड़क, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने पर है।

कैबिनेट बैठक के बाद MSME मंत्री चैतन्य कश्यप ने फैसलों की जानकारी दी। बैठक में अलग-अलग विभागों की 23,228 करोड़ रुपए की योजनाओं को जारी रखने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक दिलाने, सिंचाई परियोजनाओं, किसानों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े फैसले भी किए गए।

प्रदेश में कहां विकसित होंगे 15 नए सैटेलाइट टाउन?

मध्य प्रदेश में 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने की योजना बनाई गई है। सैटेलाइट टाउन ऐसे नियोजित शहर या कस्बे होते हैं, जिन्हें बड़े शहरों के आसपास या उनके प्रभाव क्षेत्र में विकसित किया जाता है। इनका उद्देश्य बड़े शहरों पर बढ़ते आबादी और बुनियादी सुविधाओं के दबाव को कम करना होता है।

सरकार की योजना में इन नए टाउन को बेहतर सड़क नेटवर्क और आधुनिक शहरी सुविधाओं से जोड़ने पर जोर है। हालांकि, फिलहाल इन 15 सैटेलाइट टाउन के लिए स्थानों की अंतिम सूची और उनके विकास की समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।

इंदौर में हुए अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में शहरी विकास से जुड़े 2,013 करोड़ रुपए के MOU हुए थे। इसके साथ ही इंदौर आर्थिक क्षेत्र के वर्ष 2047 तक के विकास की रूपरेखा भी जारी की गई। इस योजना में भविष्य की आबादी, निवेश, रोजगार और शहरी विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखा गया है।

मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना: रजिस्ट्री का खर्च सरकार उठाएगी

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना को लेकर भी अहम निर्देश दिए गए। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक दिलाने के लिए रजिस्ट्री का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

सरकार के मुताबिक, अब तक इस योजना के तहत 15 लाख रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। 15 नवंबर तक इनकी संख्या 20 लाख पहुंचने का अनुमान है। वहीं, सरकार ने साल 2026 के अंत तक 50 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा है।

इस योजना के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री होने से लोगों को मालिकाना हक का दस्तावेज मिलेगा। इसके आधार पर वे भविष्य में बैंक से लोन लेने जैसी वित्तीय सुविधाओं का लाभ भी उठा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को योजना के तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

23,228 करोड़ की योजनाएं जारी रहेंगी

कैबिनेट ने विभिन्न विभागों की कुल 23,228 करोड़ रुपए की योजनाओं को आगे जारी रखने का फैसला लिया है। इनमें वन विभाग की आठ योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत प्रशिक्षण केंद्रों से जुड़े काम भी जारी रहेंगे। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की निवेश संबंधी योजना को भी निरंतर जारी रखने की मंजूरी दी गई है।

पन्ना, विदिशा और मऊगंज की सिंचाई योजनाओं को मंजूरी

किसानों और सिंचाई सुविधाओं को लेकर भी कैबिनेट ने फैसले किए हैं। जल संसाधन विभाग से जुड़े चार कार्यों को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इनमें पन्ना जिले की मझगवां सिंचाई योजना, विदिशा जिले की लटेरी तहसील से जुड़ी योजना और मऊगंज की हनुमंता सिंचाई योजना शामिल हैं।

इसके अलावा सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखने से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं और धार्मिक आयोजनों के लिए नदी में पानी का पर्याप्त बहाव बनाए रखना है।

नीलगाय से फसलों को बचाने के लिए बोमा पद्धति

प्रदेश के किसानों को नीलगाय और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार बोमा पद्धति का इस्तेमाल कर रही है। इस तकनीक के लिए अफ्रीका के विशेषज्ञों को बुलाकर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

सरकार के मुताबिक, इस पद्धति की मदद से 20 से ज्यादा हिरण और नीलगाय को पकड़कर वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में छोड़ा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों की फसलों को बचाने के साथ वन्यजीवों का संरक्षण करना है।

सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 2% बढ़ोतरी

कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला भी लिया गया है। इससे राज्य के कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा। हालांकि, बढ़ी हुई दर किस तारीख से लागू होगी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

18 नवंबर को गांधीसागर में होगी अगली कैबिनेट बैठक

मोहन सरकार की अगली कैबिनेट बैठक 18 नवंबर को गांधीसागर में प्रस्तावित है। यह बैठक सरकार की डेस्टिनेशन कैबिनेट पहल के तहत आयोजित की जाएगी। इससे पहले सरकार अहिल्याबाई से जुड़े स्थान और जगदीशपुर में भी कैबिनेट बैठकें कर चुकी है।

सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में केंद्रित किया है। इसी को देखते हुए गांधीसागर में होने वाली अगली बैठक में किसानों से जुड़े मुद्दों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

धान खरीदी के लिए पंजीयन की तारीख बढ़ी

कैबिनेट बैठक में धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की तारीख बढ़ाकर 4 नवंबर कर दी गई है। जिन किसानों ने अब तक पंजीयन नहीं कराया है, उन्हें 4 नवंबर तक रजिस्ट्रेशन कराने का मौका मिलेगा।

इस तरह मोहन कैबिनेट की बैठक में शहरी विकास, संपत्ति के मालिकाना हक, सिंचाई, किसानों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई फैसले लिए गए। सरकार का कहना है कि नए सैटेलाइट टाउन और शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं के जरिए प्रदेश में भविष्य की आबादी और आर्थिक गतिविधियों के हिसाब से बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।