MP Insurance Scam : जिंदा लोगों को कागजों में मारकर डकार गए करोड़ों रुपये, MP बीमा घोटाले का CG से कनेक्शन

MP Insurance Scam : मध्य प्रदेश में 9.60 करोड़ रुपये के कथित बीमा घोटाले की जांच छत्तीसगढ़ पहुंची। कबीरधाम के तीन ग्रामीणों के नाम पर 6 लाख रुपये के क्लेम सामने आए, जबकि दो ग्रामीण जीवित मिले।

MP Insurance Scam : जिंदा लोगों को कागजों में मारकर डकार गए करोड़ों रुपये, MP बीमा घोटाले का CG से कनेक्शन

MP Insurance Scam : भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत कथित 9.60 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। आरोप है कि जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर बीमा क्लेम की रकम निकाली गई। मध्य प्रदेश सीआईडी ने मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं। अब तक 121 संदिग्ध बीमा दावों में फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं, जबकि 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के तीन ग्रामीणों के नाम भी सामने आए हैं।

कबीरधाम के 3 ग्रामीणों के नाम पर 6 लाख के क्लेम

कबीरधाम जिले के पंडरिया ब्लॉक के बदनाचुआ गांव के बाबूलाल मरावी, गंगाराम मरावी और रामकुमार के नाम पर दो-दो लाख रुपये के बीमा क्लेम किए जाने की जानकारी सामने आई है। दस्तावेजों में तीनों को मृत बताया गया था। मध्य प्रदेश पुलिस के अनुरोध पर कुकदूर पुलिस ने गांव पहुंचकर उनकी जानकारी जुटाई। जांच में बाबूलाल और गंगाराम जीवित मिले। वहीं, रामकुमार के परिजनों ने बताया कि वह रोजी-रोटी के लिए रायपुर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपने नाम पर बीमा पॉलिसी और क्लेम किए जाने की जानकारी नहीं थी। स्थानीय पुलिस ने उनकी स्थिति की पुष्टि कर मध्य प्रदेश पुलिस को सूचना भेज दी है।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों से रकम निकालने का आरोप

जांच के मुताबिक, कथित गिरोह ने अलग-अलग लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसियां लीं और बाद में उन्हें मृत दिखाकर क्लेम किया। आरोप है कि कुछ मामलों में नगर निकायों और अन्य स्थानीय कार्यालयों से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए गए। कई मामलों में बीमा धारक का पता, कथित मृत्यु का स्थान और प्रमाण पत्र जारी करने वाला कार्यालय अलग-अलग मिला। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की सत्यता और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

एक मोबाइल नंबर और कई खातों से बढ़ा शक

जांच में कई संदिग्ध समानताएं सामने आई हैं। अलग-अलग बीमा धारकों के दस्तावेजों में एक ही मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी दर्ज होने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति को कई पॉलिसियों में नामांकित भी बताया गया है। मुरैना और ग्वालियर के कुछ पतों पर कई बैंक खाते पाए गए। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल बीमा क्लेम की रकम निकालने के लिए किया गया। रतलाम की एक बैंक शाखा से जुड़े 62 खातों में करीब ढाई करोड़ रुपये के क्लेम की भी जांच की जा रही है।

इंदौर से बेंगलुरु तक खंगाले जा रहे बैंक रिकॉर्ड

सीआईडी की जांच में बैंक खातों के दस्तावेज अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। इंदौर की पीपल्याहाना शाखा से 59 खातों के ओपनिंग फॉर्म, केवाईसी दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट जुटाए गए हैं। बेंगलुरु स्थित पंजाब नेशनल बैंक की रामानगरम शाखा से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि खाते किसने खुलवाए, बीमा पॉलिसियां किसके नाम पर ली गईं और क्लेम की रकम किन खातों में पहुंची।

योजना की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत पात्र बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर नामांकित व्यक्ति को दो लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। इस योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को कम प्रीमियम पर जीवन बीमा सुरक्षा देना है। लेकिन कथित फर्जीवाड़े ने बैंक खातों, मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और बीमा क्लेम की जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच का मुख्य उद्देश्य पूरे नेटवर्क की पहचान करना, रकम के लेन-देन का पता लगाना और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करना है।