इंटर कास्ट मैरिज : पैसे मिलने के बाद भी कम लोग ले रहे अंतरजातीय विवाह योजना का फायदा, MP में 1,646 लाभार्थी

MP Intercaste Marriage Scheme : मध्य प्रदेश अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के लाभार्थियों की संख्या में देश में सातवें स्थान पर है। महाराष्ट्र में 8,566 और MP में 1,646 लाभार्थियों को सहायता मिली।

इंटर कास्ट मैरिज : पैसे मिलने के बाद भी कम लोग ले रहे अंतरजातीय विवाह योजना का फायदा, MP में 1,646 लाभार्थी

MP Intercaste Marriage Scheme : भोपाल। जाति की सीमाओं से बाहर निकलकर जीवनसाथी चुनने वाले दंपतियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार आर्थिक सहायता देती है, जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल सके। लेकिन इस योजना का लाभ लेने वालों में मध्य प्रदेश सातवें स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र में अंतरजातीय विवाह का फायदा लेने वाली दंपतियों की संख्या मध्य प्रदेश से पांच गुनी है। वहीं, कर्नाटक, तमिलनाडु और हरियाणा जैसे राज्य भी मध्य प्रदेश से आगे हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के लाभार्थियों की संख्या में महाराष्ट्र देश में पहले स्थान पर रहा। यहां 8,566 दंपतियों को प्रोत्साहन मिला। वहीं कर्नाटक में 2,798, तमिलनाडु में 2,476, हरियाणा में 2,350 और ओडिशा में 2,039 लाभार्थी दर्ज किए गए।

इनके अलावा गुजरात में भी 1,775 लोगों को योजना का लाभ मिला, जबकि मध्य प्रदेश में यह संख्या केवल 1,646 रही। इस आधार पर आंकड़ों में मध्य प्रदेश सातवें स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल में 1,510, छत्तीसगढ़ में 1,061 और हिमाचल प्रदेश में 959 लाभार्थियों को प्रोत्साहन मिला।

दंपती को दो लाख रुपये की सहायता

मध्य प्रदेश में अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र दंपती को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जातियों के प्रति अस्पृश्यता दूर करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। निर्धारित पात्रता के अनुसार दंपती में से किसी एक का मध्य प्रदेश की अधिसूचित अनुसूचित जाति का सदस्य होना, मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना और विवाह का हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत होना जरूरी है। वहीं सहायता राशि दंपती के संयुक्त बैंक खाते में जमा की जाती है।

एमपी में बढ़ते-घटते रहे अंतरजातीय विवाह

पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़े देखें तो मध्य प्रदेश में योजना के लाभार्थियों की संख्या में उतार-चढ़ाव बना रहा है। वर्ष 2020-21 में 1,010 और 2021-22 में 1,015 लोगों को प्रोत्साहन मिला। वहीं 2022-23 में यह संख्या घटकर 407 रह गई। इसके बाद 2023-24 में 1,198 और 2024-25 में बढ़कर 1,646 हो गई। यानी 2022-23 के मुकाबले 2024-25 में लाभार्थियों की संख्या 1,239 अधिक रही।

महाराष्ट्र में पांच गुना से ज्यादा लाभार्थी क्यों

महाराष्ट्र में 8,566 और मध्य प्रदेश में 1,646 लाभार्थियों के बीच 6,920 का अंतर है। मतलब महाराष्ट्र में योजना का लाभ पाने वालों की संख्या मध्य प्रदेश के मुकाबले लगभग 5.2 गुना है। इस मामले में सामाजिक न्याय विभाग से सेवानिवृत्त वित्त आयुक्त विश्वजीत झारिया का कहना है कि, इस अंतर को दोनों राज्यों में होने वाले कुल अंतरजातीय विवाहों की संख्या का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि योजना की जानकारी, आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता, दस्तावेजों की उपलब्धता और आवेदनों के निपटारे की गति भी लाभार्थियों की संख्या को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि झारिया मानते हैं कि तुलनात्मक अध्ययन के लिए औसत आंकड़े भी अंतरजातीय विवाहों की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2024-25 के आंकडों में कई राज्य मध्य प्रदेश से आगे रहे। कर्नाटक में 2,798 लाभार्थी रहे, जो मध्य प्रदेश के 1,646 से 1,152 अधिक हैं।

वहीं तमिलनाडु में 2,476 और हरियाणा में 2,350 लोगों को इस योजना का लाभ मिला। इसी तरह ओडिशा में 2,039 तथा गुजरात में 1,775 लाभार्थी दर्ज किए गए। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में 1,510, छत्तीसगढ़ में 1,061, हिमाचल प्रदेश में 959 और राजस्थान में 284 लोगों को योजना के तहत प्रोत्साहन मिला।