पुणे में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम, छात्राओं ने शिक्षा, करियर समानता और कई सामाजिक विषयों पर चर्चा की
पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्राओं से शिक्षा, करियर, पेपर लीक, रोजगार, सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर चर्चा की। छात्राओं ने भर्ती, छात्रावास की उम्र सीमा और छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्राओं से सीधे संवाद किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं और युवा महिलाओं के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, करियर, महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम पुणे के एसएसपीएमएस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित किया गया था। पुलिस ने आयोजन को 30 शर्तों के साथ अनुमति दी थी।
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठा
कार्यक्रम में छात्राओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर से जुड़ी चिंताएं राहुल गांधी के सामने रखीं। राहुल गांधी ने भी कहा कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की अनिश्चितता का असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है और इसका प्रभाव छात्राओं पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने छात्राओं से संवाद के दौरान उनके करियर, सामाजिक दबाव और भविष्य से जुड़े सवालों को सुना। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने जीवन और भविष्य से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
महिलाओं की आजादी और समानता पर राहुल गांधी का जोर
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और समान अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी की संपत्ति या अधीन व्यक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और उन्हें अपने फैसले स्वयं लेने का अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने समाज में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने वीडियो का जिक्र करते हुए महिलाओं को लेकर सामाजिक सोच और दोहरे मापदंडों पर अपनी बात रखी।
LIVE: Chhatron Ki Goonj | Women Special Maha Rally | Pune, Maharashtra https://t.co/4j1PYykkNS
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 22, 2026
BJP-RSS पर सीधा हमला, वीडियो से साधा निशाना
राहुल गांधी ने छात्राओं से संवाद के दौरान कहा कि उनकी लड़ाई उस “मनुस्मृति मानसिकता” और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ है, जिसमें महिलाओं की पहचान और आजादी को पुरुष रिश्तों से बांधकर

देखा जाता है। उन्होंने BJP और RSS पर महिलाओं की स्वतंत्रता सीमित करने वाली सोच रखने का आरोप लगाया।
उन्होंने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो भी दिखाया और कहा कि जब लड़के गाली देते हैं तो अक्सर उसे अलग तरीके से देखा जाता है, लेकिन लड़कियों के ऐसा करने पर प्रधानमंत्री को Cultural Shock होता है।
“कल्चरल शॉक” मतलब = उस भ्रम, बेचैनी या मानसिक तनाव को कहते हैं जो किसी व्यक्ति को तब महसूस होता है जब वह किसी नए, अलग और अनजान सांस्कृतिक परिवेश में जाता है। उसे देखता हे या खान-पान, भाषा, रहन-सहन और सामाजिक नियमों में अचानक आए बदलाव के कारण हो सकता है। सीधी भाषा में कहे तो ये दौर कहा जा रहे हे एसा भीं होता हे क्या मतलब सभ्यता को लेकर अकल्पनीय कुछ नया देखने को मिले
राहुल ने इसे महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सामाजिक मानदंड का उदाहरण बताया।
‘सिर्फ छात्रो की आवाज सुनने’ के लिए रखा गया था विशेष कार्यक्रम
‘छात्रों की गूंज’ राहुल गांधी की युवाओं से संवाद की पहल का हिस्सा है। पुणे में आयोजित इस संस्करण को विशेष रूप से लड़कियों के लिए रखा गया था। कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने कहा था कि इस बार छात्राएं अपनी बात रखेंगी और उनकी आवाज देश तक पहुंचेगी।
पुलिस के अनुमति आदेश के अनुसार कार्यक्रम का फोकस महिला छात्राओं से जुड़े शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के मुद्दों पर था।

छात्रावास में एज लिमिट का मुद्दा भी चर्चा में
कार्यक्रम में एक युवती द्वारा महाराष्ट्र सरकार आदिवासी विकास विभाग सरकारी आदिवासी छात्रावासों /विभाग और उम्र सीमा से जुड़ी समस्या उठाई है। भर्ती की आयु सीमा 26 वर्ष और अवसर समाप्त होने को लेकर युवाओं की चिंता का मुद्दा उठाया गया। और स्कॉलरशिप सरकारी यूनिवर्सिटीयो में विषयों की उपलब्धता के विषय भी कार्यक्रम में उठाये गये
पुणे का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम छात्राओं की समस्याओं को केंद्र में रखने वाला राजनीतिक और सामाजिक संवाद बना। प्रतियोगी परीक्षाओं, करियर, महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी ने छात्राओं से सीधे बातचीत की।
अब इस कार्यक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्राओं द्वारा उठाए गए मुद्दों—खासकर परीक्षा व्यवस्था, रोजगार और भर्ती से जुड़े सवालों—पर आगे राजनीतिक और सरकारी स्तर पर क्या प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

