सिर्फ कागज का टुकड़ा रह जाएगी डिग्री : RNTU के लॉ पाठ्यक्रम को BCI की मान्यता नहीं, फिर भी दे रहे छात्रों को प्रवेश
RNTU बिना मान्यता के विद्यार्थियों को लॉ कोर्स में प्रवेश दे रहा है, जो विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है। उनके भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है।
भोपाल। रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (RNTU) के तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से मान्यता नहीं मिली है, लेकिन प्रवेश जारी हैं। बीसीआई ने ऐसे निजी विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है, जिनके पास मान्यता नहीं है। इसमें नंबर एक पर आरएनटीयू है। आरएनटीयू बिना मान्यता के विद्यार्थियों को लॉ कोर्स में प्रवेश दे रहा है, जो विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है। उनके भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है।
मान्यता नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थियों को मिलने वाली डिग्री सिर्फ रद्दी का टुकड़ा बनकर रह जाएगी। यहां तक कि उन्हें बीसीआई की ओर से वकालत करने की मंजूरी भी नहीं दी जाएगी। संस्थान से निकलने वाले विद्यार्थी सिविल जज और एमपीपीएससी की ओर से आयोजित होने वाले एडीपीओ की भर्ती परीक्षा में भागीदारी करने से भी बाहर हो जाएंगे। जिला और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की अनुमति भी नहीं रहेगी।
मान्यता के बिना फीस लेना धोखाधड़ी
RNTU में जिन विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है और उन्हें बाद में पता चला कि संस्थान के पास बीसीआई की मान्यता नहीं है, वे हैरान परेशान है। उनका कहना उनके साथ संस्थान की ओर से धोखाधड़ी की जा रही है। मान्यता के अभाव में प्रवेश देकर आरएनटीयू अपराध कर रहा है। अब छात्र शिकायत करने की तैयारी में है। प्रवेश लेने के लिए उन्होंने हजारों रुपए की फीस जमा कर दी है और सस्थान ने फीस जमा भी करा ली है। यह जानते हुए भी कि बिना मान्यता प्रवेश देना और फीस लेना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
खूब लगा दिए गए होर्डिंग और बैनर
आईसेक्ट ग्रुप के निजी विश्वविद्यालय के होर्डिंग, पोस्टर और बैनर पूरे सूबे में खूब लगा दिए गए हैं। यह बैनर-पोस्टर संस्थान के प्रचार-प्रसार के लिए लगाए गए हैं। खास बात यह कि बैनर-पोस्टर में मुख्यमंत्री लेकर तमाम दिग्गज हस्तियों के चेहरे भी लगाए गए हैं। तमाम हस्तियों की तस्वीरों के नीचे ऐसे कोर्स के नाम भी लिख दिए गए हैं, जिनकी मंजूरी दोनों विवि को नहीं मिली है। अकेले मध्यप्रदेश नहीं, बल्कि अपने आपको देश का श्रेष्ठ संस्थान बताने वाले आईसेक्ट ग्रुप ने विद्यार्थियों को शिक्षित करने के नाम पर करोड़ों रुपए फीस के नाम पर जमा करा लिए हैं। इसकी शिकायतें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर कई जगह की गई है।
आईसेक्ट ग्रुप के निजी विश्वविद्यालय की करतूतें अब बैनर और पोस्टर पर दिखाई देने लगी है। राजधानी नहीं, बल्कि राज्य के कई शहरों में आईसेक्ट ग्रुप के साथ आरएनटीयू और स्कोप ग्लोबल स्किल विश्वविद्यालय (SGSU) के होडिंग लगे हुए हैं। बैनर-पोस्टर में सभी कोर्स और फैकेल्टी होने के दावे किए गए हैं, जबकि मैदानी हकीकत कुछ और है।
आरएनटीयू और एसजीएसयू में मापदंड के मुताबिक फैकेल्टी मौजूद नहीं हैं। इसके बाद आरएनटीयू और एसजीएसयू ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को प्रवेश देने में लगे हैं। सभी तथ्य सामने होने के बाद निजी विवि विनियामक आयोग ने भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
यूजीसी के मापदंडों की हो रही अनदेखी
आईसेक्ट ग्रुप के आरएनटीयू और एसजीएसयू में फैकल्टी के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। संस्थान विधि, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने में लगा हुआ है। यहां तक पीएचडी भी करा रहे हैं, जबकि पीएचडी को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सख्त बना है। इसके बावजूद आरएनटीयू और एसजीएसयू ने यूजीसी की अनदेखी कर पीएचडी में प्रवेश दे रहे हैं। यूजीसी ने स्पष्ट किया कि कोई भी विवि प्रवेश परीक्षा दिए बिना पीएचडी में प्रवेश नहीं कराएगा। फिर भी आरएनटीयू और एसजीएसयू प्रवेश दे रहे हैं।
यूजीसी के नियमानुसार प्रोफेसर आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार विद्यार्थियों को पीएचडी करा सकते हैं। आरएनटीयू के विधि विभाग में एक भी प्रोफेसर मौजूद नहीं है। इसके बावजूद वह पीएचडी में प्रवेश दे रहा है। ऐसा नहीं है कि निजी विवि विनियामक आयोग को इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी होने के बावजूद उसकी अनदेखी कर रहा है।
किस मतलब का हुआ पोर्टल
आयोग ने सूबे के सभी विवि की जानकारी देने के लिए एक पोर्टल तैयार किया है। इसमें हर विवि को अपने संस्थान की हर विषय की फैकेल्टी का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य है। आरएनटीयू और एसजीएसयू ने कोई ब्यौरा आयोग को नहीं दिया है। आयोग के पोर्टल पर सेज विवि का भी फैकल्टी को लेकर कोई ब्यौरा मौजूद नहीं है।

