शिवराज सिंह की पुस्तक अपनापन का दिल्ली में विमोचन, नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव पर साझा किए किस्से

दिल्ली के पूसा भवन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का लोकार्पण हुआ. कार्यक्रम में वेंकैया नायडू और एच.डी. देवेगौड़ा मौजूद रहे. पुस्तक में नरेंद्र मोदी के साथ शिवराज के आत्मीय अनुभव और प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए गए हैं.

शिवराज सिंह की पुस्तक अपनापन का दिल्ली में विमोचन, नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव पर साझा किए किस्से
भोपाल: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक दिलचस्प और भावुक किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे और प्रधानमंत्री मोदी रीवा के दौरे पर आने वाले थे, तब मोदी जी ने उन्हें फोन कर एक विशेष प्रस्तुति तैयार करने को कहा था. शिवराज सिंह के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी चाहते थे कि एक बेटी “धरती मां” का रूप निभाए और लोगों को संदेश दे कि “मुझे मत मारो, मैं तुम्हारी मां हूं.  शिवराज ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी नृत्य-नाटिका को खड़े होकर देखते रहे. वे इसलिए खड़े रहे ताकि वहां मौजूद जनता भी उसी गंभीरता और ध्यान के साथ उस प्रस्तुति और उसके संदेश को समझे. 

शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक अपनापन में नरेन्द्र मोदी संग मेरे अनुभव में ऐसे ही आत्मीय और संदेश देते प्रसंग साझा किए गए हैं. आज दिल्ली में पूसा भवन में इस पुस्तक का लोकार्पण हुआ. पूर्व उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में इसका लोकार्पण किया. इस मौके पर वेंकैया नायडू ने वो किस्सा साझा किया कि कैसे पहली बार मुख्यमंत्री पद के लिए शिवराज के नाम पर मुहर लगी थी.

वैंकया नायडू ने बताया शिवराज पर ऐसे लगी मुहर

पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस मौके पर कहा, "जब कभी प्रधानमंत्री पद को लेकर चर्चा होती थी, तब वे कहा करते थे कि मोदी का अर्थ है मेकिंग ऑफ डेवलप्ड इंडिया और आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें यह भाव प्रत्यक्ष दिखाई देता है."

वेंकैया नायडू ने शिवराज सिंह चौहान के संदर्भ में एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया, "जब वरिष्ठ नेता अनौपचारिक चर्चा में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पर विचार कर रहे थे, तब उन्होंने शिवराज सिंह चौहान का नाम सुझाया था. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सामूहिक सहमति से लिया गया यह निर्णय पूरी तरह सही सिद्ध हुआ. उस समय कुछ लोगों को आशंका थी कि मध्य प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों में शिवराज सिंह चौहान को कठिनाई हो सकती है, लेकिन उन्होंने अपने व्यवहार, सादगी, सेवा और संवाद से सबका विश्वास जीत लिया."

'भारत की आत्मा गांव में बसती है'

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह की पुस्तक अपनापन को जनसेवा, ग्रामीण भारत और किसान संवेदना से जोड़ते हुए देखा. उन्होंने कहा, "भारत की लोकतांत्रिक आत्मा गांवों, खेतों, श्रम और साधारण जन के जीवनानुभवों से बनती है, इसलिए ऐसा नेतृत्व सबसे अधिक प्रभावशाली होता है जो इस धरातल को समझता हो. कोई भी व्यक्ति तभी जननेता बनता है जब वह जनता की भाषा, उनकी चिंता और उनके जीवन-संघर्ष को भीतर से महसूस करता हो." उन्होंने अपनापन पुस्तक को नेतृत्व के उसी जीवंत, मानवीय और लोकाभिमुख स्वरूप का विस्तार बताया.

शिवराज ने बताया उस सभा में मोदी जी का गला भर आया

केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "पुस्तक अपनापन नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव मोदी जी के साथ 35 वर्षों की सहयात्रा, मोदी जी की सेवा, संगठन और नेतृत्व का जीवंत दस्तावेज है. इस पुस्तक में नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव में कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री तक की यात्रा है. उन्होने एक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि मेरा और नरेन्द्री मोदी जी का साथ एकता यात्रा से शुरू हुआ. उस यात्रा के संचालन की पूरी जिम्मेदारी मोदी जी को सौंपी गई थी."

वे बताते हैं कि "प्रमोद महाजन जी ने मुझे फोन कर कहा था कि युवाओं को जोड़ने के लिए केसरिया वाहिनी बनाई जा रही है, और मुझे उसका संयोजक बनकर काम करना है. उस समय की कांग्रेस सरकार ने यात्रा को रोकने और समझाने की कोशिश की कि, श्रीनगर के लाल चौक तक नहीं जा सकते. बाद में निर्णय हुआ कि सभी लोग आगे नहीं जाएंगे, केवल जोशी जी, मोदी जी और कुछ साथी ही श्रीनगर जाएंगे. श्रीनगर के लाल चौक पर डॉ जोशी जी और मोदी जी ने तिरंगा फहराया. उस अवसर पर नरेंद्र भाई का भाषण आज भी मुझे याद है."