सतना में EOW का छापा: सहकारी समिति के प्रभारी प्रबंधक की 92 लाख की संपत्ति उजागर, खाद घोटाले में भी FIR दर्ज

EOW रीवा की छापेमारी में खुलासा: सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज, वैध आय 17.51 लाख, संपत्ति और खर्च 92.16 लाख रुपये, आय से 426% ज्यादा संपत्ति उजागर, खाद वितरण में गड़बड़ी और फर्जी किसानों के नाम पर खाद की बिक्री के आरोप सामने आए

सतना में EOW का छापा: सहकारी समिति के प्रभारी प्रबंधक की 92 लाख की संपत्ति उजागर, खाद घोटाले में भी FIR दर्ज

सतना। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने सेवा सहकारी समिति अमकुई के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। जांच में उनकी कुल संपत्ति और खर्च 92 लाख 16 हजार 174 रुपये पाए गए, जो उनकी ज्ञात वैध आय से करीब 426 प्रतिशत अधिक हैं।

EOW के अनुसार, सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल की नियुक्ति साल 2006 में विक्रेता के पद पर हुई थी। साल 2020 में उन्हें प्रभारी समिति प्रबंधक बनाया गया। जनवरी 2007 से सितंबर 2025 तक की जांच अवधि में उनकी वैध आय 17,51,050 रुपये आंकी गई।

वहीं, शुरुआती जांच में 57,68,622 रुपये का खर्च सामने आया। इसके अलावा 22.50 लाख रुपये की जमीन के दस्तावेज और 11,97,552 रुपये के सोने के आभूषणों की जानकारी मिली। इस तरह कुल संपत्ति और खर्च 92.16 लाख रुपये आंका गया।

मकान, गाड़ियां और बीमा पॉलिसियों की जांच

छापेमारी और जांच के दौरान ईओडब्ल्यू को 6 बैंक खातों, 6 बीमा पॉलिसियों और कई वाहनों की जानकारी मिली। इनमें हुंडई क्रेटा, विटारा ब्रेजा, महिंद्रा ट्रैक्टर, बुलेट और पैशन प्रो शामिल हैं। जांच में नागौद क्षेत्र में 2200 वर्गफीट का पक्का मकान बनवाने और बेटे की दिल्ली में पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने की बात भी सामने आई है। EOW अब बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है।

194 किसानों में 122 के नाम फर्जी होने का आरोप

EOW ने खाद वितरण में गड़बड़ी को लेकर भी अलग मामला दर्ज किया है। आरोप है कि सेवा सहकारी समिति अमकुई में यूरिया की निर्धारित दर 593 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों से 600 रुपये प्रति क्विंटल वसूले गए। जांच के अनुसार, पीओएस मशीन में 194 किसानों का विवरण दर्ज था, जिनमें से 122 किसानों के नाम फर्जी पाए गए। आरोप है कि इन प्रविष्टियों के जरिए खाद की कालाबाजारी की गई।

जांच में यह भी सामने आया कि किसानों के परमिट और रसीदों की कार्बन प्रतियों में बदलाव करके यूरिया और DAP की 10 से 20 अतिरिक्त बोरियां दर्ज की गईं। इसके आधार पर ऋण समायोजन कराने और फर्जी स्टॉक रजिस्टर तैयार करने के आरोप भी हैं।

दो अलग-अलग मामले में FIR दर्ज

EOW ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में FIR क्रमांक 110/2026 और खाद वितरण में कथित धोखाधड़ी, दस्तावेजों में कूटरचना और कालाबाजारी के मामले में FIR क्रमांक 111/2026 दर्ज की है।

दोनों मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। फिलहाल बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।