iFOREST Fire Watch : पंजाब से मध्यप्रदेश तक पराली जलाने की निगरानी, एक क्लिक पर मिलेगी आग की पूरी जानकारी

iFOREST Fire Watch : iFOREST ने पराली जलाने की निगरानी के लिए Fire Watch डैशबोर्ड लॉन्च किया है। मध्यप्रदेश समेत चार राज्यों में शुरू हुई इस व्यवस्था से आग की घटनाओं, समय और प्रभावित कृषि भूमि की जानकारी मिलेगी।

iFOREST Fire Watch : पंजाब से मध्यप्रदेश तक पराली जलाने की निगरानी, एक क्लिक पर मिलेगी आग की पूरी जानकारी

iFOREST Fire Watch : नई दिल्ली। खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (iFOREST) ने नया डिजिटल डैशबोर्ड 'फायर वॉच' लॉन्च किया है। यह तकनीक केवल खेतों में आग की घटनाओं की गिनती नहीं करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि पराली जलाने की घटनाएं कब सबसे ज्यादा होती हैं और इससे कितनी कृषि भूमि प्रभावित होती है। इसके पहले चरण में मध्यप्रदेश समेत चार राज्यों को शामिल किया गया है।

चार राज्यों में शुरू हुई निगरानी व्यवस्था

फायर वॉच के शुरुआती चरण में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश को शामिल किया गया है। आने वाले समय में अन्य राज्यों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड का उद्देश्य पराली जलाने की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाना और संबंधित विभागों तक उपयोगी आंकड़े पहुंचाना है।

तीन स्तरों पर रखी जाएगी आग की निगरानी

यह डैशबोर्ड तीन महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराएगा। पहली, खेतों में सक्रिय आग की संख्या और उनका स्थान। दूसरी, दिन का वह समय जब पराली जलाने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। तीसरी, पूरे सीजन में आग से प्रभावित कृषि भूमि का अनुमान। इससे प्रशासन और नीति बनाने वाले विभागों को समस्या का आकलन करने में मदद मिलेगी।

कई सैटेलाइट मिलकर जुटाएंगे जानकारी

फायर वॉच में MODIS और VIIRS जैसे सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाएगा। ये खेतों में सक्रिय आग की पहचान करेंगे। वहीं, मीटियोसैट-8 और मीटियोसैट-9 के SEVIRI सेंसर लगभग हर 15 मिनट में जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इससे पराली जलाने का सबसे सक्रिय समय पता लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सेंटिनल-2 की हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरों से सीजन से पहले और बाद की जमीन की स्थिति की तुलना कर जले हुए कृषि क्षेत्र का अनुमान लगाया जाएगा।

प्रदूषण रोकने और किसानों के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद

iFOREST के सीईओ डॉ. चंद्र भूषण के मुताबिक, केवल आग की संख्या जानना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि आग कहां और कब लगाई जा रही है तथा कितनी जमीन प्रभावित हो रही है। फायर वॉच पर इंटरैक्टिव नक्शे, चार्ट और फिल्टर के जरिए जानकारी मिलेगी। इसके साथ साप्ताहिक बुलेटिन भी जारी किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को कम करना और वायु प्रदूषण के साथ मिट्टी को होने वाले नुकसान पर नियंत्रण के लिए बेहतर योजनाएं तैयार करना है।