शिक्षा मंदिर या उपेक्षा की इमारत : छात्रों के लिए सुविधाओं का अकाल, 1250 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

Mauganj News : महाविद्यालय के दरवाजे-खिड़कियां दीवारें शौचालय क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं, छतों से बरसात में पानी टपकता है। वही पंखे और प्रकाश व्यवस्था भी बदहाल है।

शिक्षा मंदिर या उपेक्षा की इमारत : छात्रों के लिए सुविधाओं का अकाल, 1250 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

राजेंद्र पयासी @ मऊगंज

जहां शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला कहा जाता है, वहीं मऊगंज जिले के नईगढ़ी तहसील के ठाकुर सोमेश्वर सिंह शासकीय महाविद्यालय की वर्तमान तस्वीर इस कथन को कठघरे में खड़ी करती नजर आती है। कभी ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के सपनों को पंख देने के उद्देश्य से स्थापित यह महाविद्यालय आज स्वयं बदहाली के आंसू रो रहा है। भवन की जर्जर दीवारें, टपकती छतें और अव्यवस्थाओं का आलम देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि उपेक्षा की जीती-जागती मिसाल बन गया हो।

ज्ञात हो कि इस महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1989 में हुई थी। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वर्ष 2017 में नगर परिषद नईगढ़ी के वार्ड क्रमांक 08 में इसके नवीन भवन का लोकार्पण किया गया था। तब उम्मीद जगी थी कि अब क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। परंतु वर्तमान हकीकत इन उम्मीदों पर पानी फेर रही है।

वर्तमान में इस महाविद्यालय में लगभग 1250 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। संख्या के अनुपात में सुविधाओं का घोर अभाव है। कक्षाओं में लगी सीलिंग बड़ी दुर्घटना को बुलवा देती नजर आती हैं, विद्यार्थियों ने नाम न छापने की शर्तों पर कहा बीते डेढ़ वर्ष से छत की टूटी हुई सीलिंग लटक रही है लेकिन प्रबंधन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। दरवाजे-खिड़कियां दीवारें शौचालय क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं, छतों से बरसात में पानी टपकता है। वही पंखे और प्रकाश व्यवस्था भी बदहाल बताई जा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से आज तक महाविद्यालय में बाउंड्री वालों का निर्माण तक नहीं कराया गया।

निर्माण एजेंसी द्वारा महाविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य प्राक्कलन के विपरीत कराए जाने के कारण समय से पहले भवन जर्जर हो चुके हैं। उधर परिसर में स्वच्छता का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है और स्वच्छ पेयजल के लिए विद्यार्थियों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। यह स्थिति न केवल शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रही है, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि कहीं  भवन में लगी जर्जर सीलिंग किसी बड़ी अनहोनी को आमंत्रण न दे दे।

कागजों में खर्च हो गई मेंटेनेंस राशि?

सबसे गंभीर और विचारणीय पहलू आर्थिक अनियमितता का है। शासन द्वारा प्रतिवर्ष महाविद्यालय के रखरखाव, मरम्मत, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं के लिए मेंटेनेंस मद में राशि आवंटित की जाती है। आरोप है कि कागजों में यह राशि खर्च दिखाई जाती है, पिछले वर्ष मेंटेनेंस हेतु निविदा जारी की गई थी लेकिन धरातल पर उसका कोई सकारात्मक प्रभाव परिलक्षित नहीं होता। यदि समय पर उचित रखरखाव होता तो भवन की यह दुर्दशा नहीं होती। छात्रों ने कहा विगत वर्षों में मेंटेनेंस मद में आई राशि और उसके उपयोग का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

इसी प्रकार अध्यापन व्यवस्था को लेकर भी विद्यार्थियों में असंतोष व्याप्त है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कई नियमित शिक्षक जिला मुख्यालय रीवा से आवागमन करते हैं, जिससे उनकी महाविद्यालय में समय पर उपस्थिति प्रभावित होती है। हालांकि यह विषय जांच का है और अंतिम सत्य विभागीय जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों ने भी अब मुखर होना शुरू कर दिया है। नगर परिषद नईगढ़ी के वार्ड क्रमांक 06 की पार्षद प्रियंका सिंह ने महाविद्यालय की स्थिति का संज्ञान लेते हुए शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।

इनका कहना है

महाविद्यालय के हालात को लेकर नगर परिषद नईगढ़ी वार्ड क्रमांक 6 की पार्षद प्रियंका सिंह ने कहा जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि ठाकुर सोमेश्वर सिंह महाविद्यालय की वर्तमान स्थिति की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और भविष्य से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। 

महाविद्यालय की व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त कराया जाए,जिला प्रशासन से मांग है कि किसी बड़ी दुर्घटना की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल निरीक्षण दल भेजा जाए और भवन सुरक्षा, वित्तीय उपयोगिता, स्वच्छता, पेयजल एवं शिक्षकों की उपस्थिति की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। अन्यथा छात्रों के हित को लेकर जन आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

इस विषय को लेकर संस्था के प्राचार्य डॉ आराधना मिश्रा से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा भवन का निर्माण प्राक्कलन के विपरीत कराए जाने के कारण थोड़ी सी बारिश में ही पूरा छत टपकता है, जिसके कारण सीलिंग के साथ प्लास्टर गिरने की स्थिति में पहुंच चुकी है।

बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे कमरों में बच्चों को नहीं बैठाया जा रहा है, भवन के जीर्णोद्धार हेतु एसडीएम से स्वीकृत मिल गई है, उच्च अधिकारियों के निर्देश पर समस्याओं के निदान हेतु अतिशीघ्र कार्य कराया जावेगा।