मैहर में बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों का मौन सत्याग्रह

‘बंदरों के आतंक से पीड़ित परिवार’, ग्रामीणों ने घर के बाहर दीवारों पर चस्पा किए पोस्टर

मैहर में बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों का मौन सत्याग्रह

मैहर। जिले के रामनगर ब्लॉक में लाल मुंह वाले बंदरों के उत्पात ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। जंगल से सटे गांवों में बंदरों की फौज ने इस कदर तबाही मचाई है कि परेशान ग्रामीणों ने अब मौन सत्याग्रह का रास्ता चुना है। बड़ा इटमा गांव में दर्जनों परिवारों ने अपने घरों की बाहरी दीवारों पर बंदरों के खिलाफ स्लोगन चस्पा कर प्रशासन के प्रति अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।

सोमवार को बड़ा इटमा गांव के खिलाड़ी कोल, नेमा कोल, आशीष पांडेय, दीपक श्रीवास्तव और सुमन साकेत सहित आधा दर्जन से अधिक परिवारों ने इस अनूठे अभियान की शुरुआत की। ग्रामीणों का कहना है कि वे सालों से वन विभाग और प्रशासन को शिकायतें दे रहे हैं> लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अपनी पीड़ा को दीवारों पर लिख दिया है> ताकि आने-जाने वाले अधिकारी उनकी बेबसी को देख सकें।

घर के ऊपर छत नहीं, सिर्फ तिरपाल का साया

बंदरों ने केवल फसलों को ही नहीं, बल्कि सिर छिपाने की छत को भी निशाना बनाया है। ग्रामीणों ने बताया कि बंदरों ने गांव के अधिकांश खपरैल मकानों के खपरे तोड़ दिए हैं। मजबूरी में लोगों ने घरों को ढंकने के लिए प्लास्टिक की तिरपाल लगाई, लेकिन बंदर उन्हें भी फाड़ रहे हैं। अब धूप और बारिश से बचाव करना नामुमकिन होता जा रहा है।

10 किलोमीटर के दायरे में रेड अलर्ट

रामनगर ब्लॉक के जंगल से लगे करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्र में बंदरों का सबसे ज्यादा आतंक है। बड़ा इटमा, देवरा, मनकहरी, मन्त्री, नादो, करौंदी और खारा। बंदर केवल घरों में नहीं घुस रहे, बल्कि रबी और खरीफ, दोनों सीजन की फसलों को पूरी तरह नष्ट कर रहे हैं, जिससे किसानों की कमर टूट गई है। ग्रामीणों का यह मौन सत्याग्रह अब अन्य गांवों में भी फैल रहा है। उनकी एक ही मांग है कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित तरीके से घने जंगलों में छोड़ा जाए या उनके आतंक से बचाव के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।