प्याज के दाम में उछाल: 3 महीने में ₹30 से ₹54 किलो पहुंची कीमत, जल्द राहत के आसार
Onion Price Surge : पिछले तीन महीनों में देशभर में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून में जहां प्याज करीब ₹30 प्रति किलो बिक रहा था, वहीं सितंबर में इसका औसत खुदरा भाव बढ़कर ₹54 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया।
Onion Price Surge : पिछले तीन महीनों में देशभर में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून में जहां प्याज करीब ₹30 प्रति किलो बिक रहा था, वहीं सितंबर में इसका औसत खुदरा भाव बढ़कर ₹54 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जून को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब ₹29.50 प्रति किलो था, जो 17 सितंबर तक बढ़कर ₹53.78 प्रति किलो हो गया। इस दौरान प्याज की कीमत में करीब 82.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
थोक बाजार में भी बढ़े प्याज के भाव
खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक बाजार में भी प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। जून की शुरुआत में थोक बाजार में प्याज का औसत भाव करीब ₹22.60 प्रति किलो था, जो सितंबर में बढ़कर ₹45 प्रति किलो के पार पहुंच गया।
10 सितंबर को थोक भाव ₹46.20 प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि 17 सितंबर को यह ₹45.68 प्रति किलो रहा। यानी जून के मुकाबले प्याज के थोक भाव लगभग दोगुने हो गए हैं। कम सप्लाई के कारण मंडियों में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
फसल की आवक घटने से बढ़ी कीमतें
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह राज्यों से फसल की आवक कम होना माना जा रहा है। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को नुकसान होने के कारण आवक कम हुई है। वहीं, कर्नाटक से भी प्याज की सप्लाई में कमी रही।
इन दोनों प्रमुख उत्पादक राज्यों से आवक कम होने को कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसके अलावा नई खरीफ फसल की आवक में देरी के कारण भी बाजार में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि, आने वाले समय में कीमतों में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
दाम कम करने के लिए सरकार के प्रयास
प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए जाते हैं। इनमें बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना और जरूरत पड़ने पर निर्यात से जुड़े नियमों में बदलाव करना शामिल है।
सरकार किसानों से प्याज खरीदकर उसका बफर स्टॉक तैयार करती है। जब बाजार में प्याज के दाम बढ़ते हैं, तो इसी स्टॉक से प्याज कम कीमत पर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है। कुछ मामलों में सरकार ने करीब ₹35 प्रति किलो की दर पर प्याज उपलब्ध कराया है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। वहीं, देश में प्याज की उपलब्धता कम होने पर सरकार निर्यात पर टैक्स या अन्य प्रतिबंध भी लगा सकती है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में प्याज की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना है। सरकारी बिक्री से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि खुले बाजार में कीमतें अधिक रहने पर आम लोगों पर महंगाई का असर बना रहता है।
साल के इस समय क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
हर साल अगस्त से सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। इसका एक कारण त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना है। रक्षाबंधन, गणेश उत्सव और आने वाले त्योहारों के कारण प्याज की खपत बढ़ जाती है। वहीं, बारिश के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से मंडियों तक प्याज पहुंचने में देरी हो सकती है। इसके अलावा, इस समय पुरानी रबी फसल का स्टॉक खत्म होने लगता है, जबकि नई खरीफ फसल की आवक में समय लगता है। इससे बाजार में प्याज की सप्लाई कम होती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
प्याज के दाम कब और क्यों चढ़ते हैं?
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का संबंध मुख्य रूप से फसल के चक्र और बाजार में सप्लाई से होता है। रबी की प्याज की फसल मार्च-अप्रैल में कटती है और इसका स्टॉक अक्टूबर तक चल सकता है। इसके बाद खरीफ की नई फसल बाजार में आने लगती है। जब रबी की पुरानी फसल का स्टॉक खत्म होने लगता है और खरीफ की नई फसल आने में देरी होती है, तो बाजार में प्याज की सप्लाई घट जाती है, जिससे कीमतों पर असर पड़ता है। अगस्त से जनवरी के बीच कई बार मंडियों में प्याज की आवक कम रहती है। वहीं, सितंबर और अक्टूबर में त्योहारों के कारण मांग बढ़ने से प्याज के भाव पर दबाव बढ़ सकता है।
देश के प्रमुख शहरों में प्याज के दाम
दिल्ली में प्याज का भाव करीब ₹55 से ₹60 प्रति किलो, मुंबई में ₹52 से ₹58 प्रति किलो, चेन्नई में ₹60 से ₹65 प्रति किलो और कोलकाता में ₹55 से ₹62 प्रति किलो के आसपास है।

