स्वतंत्रता दिवस से पहले CM डॉ. मोहन यादव का बड़ा फैसला, दो वनरक्षकों को मिलेगा ‘शहीद’ का दर्जा
मध्यप्रदेश में पहली बार वनरक्षक मदनलाल वर्मा और हरिकेश गुर्जर को ‘शहीद’ का दर्जा मिलेगा। CM मोहन यादव ने दोनों के सम्मान में अलग-अलग आदेश जारी किए।
भोपाल। मध्यप्रदेश में वन विभाग के इतिहास में पहली बार ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले दो वनरक्षकों को ‘शहीद’ का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 अगस्त को दो अलग-अलग आदेश जारी कर वनरक्षक मदनलाल वर्मा और वनरक्षक हरिकेश गुर्जर को शहीद का दर्जा देने का फैसला किया।
मदनलाल वर्मा ने साल 2021 में देवास प्रमंडल में ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई थी। वहीं, अप्रैल 2026 में माफिया द्वारा ट्रैक्टर से कुचलकर वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की हत्या कर दी गई थी। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान जान गंवाने वाले दोनों वनकर्मियों को अब शहीद का दर्जा मिलेगा।
वनकर्मियों के सम्मान और मनोबल बढ़ाने वाला फैसला
मुख्यमंत्री के इस फैसले को वन विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान अपनी जान जोखिम में डालने वाले वनकर्मियों के सम्मान की दिशा में इसे बड़ा कदम बताया जा रहा है।
दोनों वनरक्षकों को शहीद का दर्जा मिलने से वन अमले में भी उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कर्मचारियों के प्रति सरकार का यह फैसला संवेदनशीलता और सम्मान को दर्शाता है।
आदेश जारी कराने में इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका
दोनों दिवंगत वनरक्षकों को शहीद का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया में वन विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका अहम रही। इनमें वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन, बीएस अन्नागिरी, एपीसीसीएफ प्रोटेक्शन अमित दुबे, सीएफ उज्जैन आलोक पाठक और मुरैना डीएफओ हरीश बघेल शामिल हैं।
इसके अलावा देवास में वर्ष 2021 में डीएफओ रहे पीएन मिश्रा की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है।
पहली बार मिला ऐसा दर्जा
मध्यप्रदेश में वन विभाग के इतिहास में यह पहली बार है, जब ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले दो वनरक्षकों को सरकार की ओर से ‘शहीद’ का दर्जा दिया गया है। सरकार के इस फैसले को जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में तैनात वनकर्मियों के लिए सम्मान और हौसला बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

