वंदे मातरम् पर सियासी संग्राम, छत्तीसगढ़ में मस्जिद-मदरसों तक पहुंचा आदेश, देश के कुछ नेताओं ने जताया विरोध
स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। सपा विधायक अबू आजमी, असदुद्दीन ओवैसी, अरशद मदनी समेत कई मुस्लिम नेताओं ने वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने पर आपत्ति जताई है।
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर स्वतंत्रता दिवस से पहले सियासत गरमा गई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोहों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें अलग-अलग स्तर के सरकारी समारोहों में राष्ट्रीय गीत के गायन का प्रोटोकॉल शामिल है। इसी दिशा-निर्देश के आधार पर अब छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने प्रदेश के मुतवल्लियों, मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को स्वतंत्रता दिवस मनाने और गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करने के संबंध में पत्र जारी किया है।
छत्तीसगढ़ में मस्जिद-मदरसे भी निर्देश के दायरे में

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से जारी पत्र में संबोधन के तौर पर “समस्त मुतवल्ली, समस्त मस्जिद/मदरसा/दरगाह आदि, समस्त जिला छत्तीसगढ़” लिखा गया है।
पत्र में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के 10 अगस्त 2026 के दिशा-निर्देश क्रमांक 2/4/2026-Public का हवाला देते हुए संबंधित संस्थानों से निर्देशों का पालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस का पर्व मनाने को कहा गया है।
वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज की ओर से मुस्लिम समाज से मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों में तिरंगा फहराने तथा राष्ट्रीय पर्व को गरिमापूर्ण तरीके से मनाने की अपील भी सामने आई है।
और इसी के साथ शुरू हो गया सियासी संग्राम
एक तरफ केंद्र के स्वतंत्रता दिवस संबंधी दिशा-निर्देश और दूसरी तरफ कुछ मुस्लिम नेताओं एवं संगठनों की वंदे मातरम् को लेकर आपत्ति—इन दोनों घटनाक्रमों ने विवाद को और हवा दे दी है।

समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी ने ताजा बयान में कहा है कि मुसलमान वंदे मातरम् नहीं गाएंगे। उनका तर्क है कि इस्लामी मान्यता के अनुसार मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करता है। उनका यह बयान स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सामने आया है।
ओवैसी भी जता चुके हैं विरोध

AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति पहले ही जाहिर कर चुके हैं। उनका तर्क रहा है कि किसी नागरिक को वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और देशभक्ति को किसी एक गीत के गायन से नहीं मापा जा सकता।
अरशद मदनी ने भी उठाया धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भी वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक मान्यता के खिलाफ कोई काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जमीयत ने जरूरत पड़ने पर अदालत जाने की बात भी कही थी।
“वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना केंद्र सरकार का न केवल एक पक्षपाती और ज़बरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है। - मौलाना अरशद मदनी

इसके अलावा AIMIM नेता वारिस पठान भी वंदे मातरम् को अनिवार्य करने के खिलाफ बयान दे चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि किसी व्यक्ति को वंदे मातरम् नहीं आता तो क्या उसे सजा दी जाएगी।
अब सवाल छत्तीसगढ़ को लेकर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 अगस्त को छत्तीसगढ़ के मस्जिदों और मदरसों में इन निर्देशों का पालन किस तरह होता है?
क्या वहां स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम आयोजित होंगे?
क्या तिरंगा फहराया जाएगा?
क्या वंदे मातरम् का गायन होगा?
और अगर कुछ लोग इसका विरोध करते हैं तो वक्फ बोर्ड या प्रशासन का अगला कदम क्या होगा?
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि गृह मंत्रालय के 10 अगस्त के पत्र में अलग-अलग सरकारी स्तरों पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रोटोकॉल दिया गया है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने इसी केंद्रीय दिशा-निर्देश का हवाला देते हुए मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों सहित संबंधित वक्फ संस्थाओं को पत्र भेजा है। इसलिए इसे सीधे “गृह मंत्रालय ने हर मस्जिद-मदरसे में वंदे मातरम् अनिवार्य किया” कहना दस्तावेज के शब्दों से आगे का दावा होगा।
कल क्या होगा, इस पर सबकी नजर
अब पूरा मामला 15 अगस्त के दिन क्या रंग लेता है, इस पर सबकी नजर है। एक तरफ वक्फ बोर्ड की ओर से मस्जिदों और मदरसों तक पहुंचे निर्देश हैं, तो दूसरी तरफ कुछ मुस्लिम नेताओं का वंदे मातरम् को लेकर विरोध।
अब देखना होगा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन देश में इस पूरे मामले का क्या असर दिखाई देता है और क्या वंदे मातरम् को लेकर सियासी संग्राम और तेज होता है।
Varsha Shrivastava 
