सिस्टम की गलती से 93 साल के किसान को 4 साल से नहीं मिली PM Kisan की किस्त
मऊगंज में 93 साल के किसान को रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने से चार साल से पीएम-किसान की किस्त नहीं मिली। किसान ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर रिकॉर्ड सुधारने और रुकी किस्त दिलाने की मांग की।
राजेंद्र पयासी मऊगंज
मऊगंज। सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने की वजह से 93 साल के किसान को चार साल से पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्त नहीं मिल रही है। नईगढ़ी तहसील के ग्राम हटवासेंगर निवासी लालमणि मिश्रा ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर पीके पांडे को आवेदन दिया। उन्होंने कहा, "साहब, हम जिंदा हैं। फिर रिकॉर्ड में हमें मृत क्यों दिखाया जा रहा है।"
लालमणि मिश्रा का पीएम-किसान योजना में वर्ष 2019 में पंजीयन हुआ था। उनकी किसान आईडी MP284794340 है। उनका आरोप है कि वर्ष 2021 में पोर्टल पर अचानक उनका स्टेटस मृत दर्ज कर दिया गया। इसके बाद से उन्हें योजना की कोई किस्त नहीं मिली। योजना के तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में 2 हजार रुपये की किस्त दी जाती है।
शिकायत के बाद भी नहीं सुधरा रिकॉर्ड
लालमणि ने बताया कि उन्होंने समस्या को लेकर तीन बार सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत की। इसके अलावा दो बार तहसीलदार कार्यालय और चार से पांच बार पटवारी के पास भी गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। हर बार उन्हें जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन पोर्टल पर उनका रिकॉर्ड नहीं सुधरा और न ही रुकी हुई किस्त मिली।

फिंगरप्रिंट ने भी बढ़ाई परेशानी
उम्र अधिक होने के कारण लालमणि के हाथों के निशान भी घिस गए हैं। बैंक में केवाईसी और ई-केवाईसी कराने पहुंचे तो मशीन पर फिंगरप्रिंट नहीं आया। इसके कारण आधार का सत्यापन भी पूरा नहीं हो सका। किसान का कहना है कि इस वजह से पीएम-किसान योजना का लाभ मिलने में और परेशानी हो रही है।

मौके पर जांच कर सुधार की मांग
लालमणि ने प्रशासन से मांग की है कि अधिकारी गांव पहुंचकर उनका भौतिक सत्यापन करें और पीएम-किसान पोर्टल पर उन्हें जीवित दर्ज कर योजना में फिर से सक्रिय किया जाए। साथ ही वर्ष 2021 से अब तक रुकी किस्तों की जांच कर भुगतान कराया जाए। उन्होंने फिंगरप्रिंट नहीं आने की स्थिति में आईरिस स्कैन या ओटीपी से ई-केवाईसी की सुविधा देने की भी मांग की है।गांव के सरपंच और कुछ किसान भी लालमणि के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे।

उनका कहना है कि लालमणि उम्र के इस पड़ाव पर भी खेती से अपना गुजारा कर रहे हैं, ऐसे में सरकारी मदद के लिए उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।मामले में अपर कलेक्टर ने राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों से जांच कराने का भरोसा दिया है। भौतिक सत्यापन के बाद रिकॉर्ड में जरूरी सुधार कराने की बात कही गई है।
Anubhav Dubey 
