RERA Reforms : बायर्स की सुरक्षा और प्रोजेक्ट की रफ्तार में संतुलन जरूरी, क्रेडाई ने चेयरमैन को सौंपा 6-बिंदु प्रतिवेदन
RERA Reforms : क्रेडाई ने प्रोजेक्ट कॉस्ट में फाइनेंस पर ब्याज, बैंक चार्ज, ऑन-साइट खर्च, डेवलपमेंट वर्क्स, सेवाओं और अन्य प्रत्यक्ष निर्माण लागत को शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
RERA Reforms : मध्य प्रदेश। भोपाल में रियल एस्टेट से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर क्रेडाई भोपाल ने मध्यप्रदेश रेरा के नए चेयरमैन शैलेंद्र सिंह से मुलाकात की। सोमवार को अध्यक्ष मनोज मीक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने चेयरमैन को पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं। इस दौरान रेरा कम्प्लायंस से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं और प्रक्रियागत विसंगतियों को लेकर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा गया।
छह प्रमुख सुधार प्रस्ताव रखे
क्रेडाई ने प्रतिवेदन में छह प्रमुख रिफॉर्म का सुझाव दिया। इसमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की वैलिडिटी को बिल्डिंग परमिशन की अवधि के बजाय प्रमोटर द्वारा घोषित प्रोजेक्ट पूरा होने की अवधि से जोड़ने की बात कही गई। सेपरेट बैंक अकाउंट से राशि निकालने के लिए सीए सर्टिफिकेट में होने वाली गणना को रेरा एक्ट और अन्य राज्यों की व्यवस्था के अनुरूप करने का सुझाव भी दिया गया।
प्रोजेक्ट लागत और एनफोर्समेंट पर उठाए सवाल
क्रेडाई ने प्रोजेक्ट कॉस्ट में फाइनेंस पर ब्याज, बैंक चार्ज, ऑन-साइट खर्च, डेवलपमेंट वर्क्स, सेवाओं और अन्य प्रत्यक्ष निर्माण लागत को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही एनफोर्समेंट ऑफिसर की शक्तियों को एक्ट और नियमों के तहत स्पष्ट करने की मांग की गई। संस्था के अनुसार अधिकार स्पष्ट नहीं होने से शिकायतों की सुनवाई और अपील की प्रक्रिया में व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं।
30 दिन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने का सुझाव
प्रतिवेदन में कहा गया कि रेरा एक्ट के तहत प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के आवेदन पर 30 दिनों में निर्णय की व्यवस्था है। हालांकि, क्रेडाई के अनुसार बार-बार कम्प्लायंस मांगे जाने से कई आवेदन महीनों तक लंबित रहते हैं। संस्था ने स्पष्ट चेकलिस्ट, समयबद्ध ऑनलाइन स्क्रूटनी और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बनाने का सुझाव दिया।
पूरी परियोजनाओं के लिए छूट की मांग
क्रेडाई ने राजस्थान की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन परियोजनाओं को सक्षम अथॉरिटी से कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिल चुका है और जिनमें बिक्री, मार्केटिंग या बुकिंग शुरू नहीं हुई है, उन्हें निर्धारित घोषणा और जांच के बाद रेरा रजिस्ट्रेशन से छूट देने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद रिपोर्टिंग को लेकर भी सुझाव
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सक्षम अधिकारी से डेवलपमेंट कम्प्लीशन पोर्टल पर अपलोड करने के बाद भी कई मामलों में क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने की बाध्यता बनी रहती है। क्रेडाई ने कम्प्लीशन अप्रूवल की प्रक्रिया, दस्तावेज और समयसीमा स्पष्ट करने तथा परियोजना पूरी होने के बाद अनिश्चित अवधि तक तिमाही रिपोर्टिंग की बाध्यता खत्म करने का सुझाव दिया।
मनोज मीक बोले- नियमों में ढील नहीं, व्यवस्था स्पष्ट हो
क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि रेरा का उद्देश्य प्रॉपर्टी बायर्स के हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार जटिल या विलंबित कम्प्लायंस से डेवलपर्स के प्रोजेक्ट और निवेश प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर होम बायर्स पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि क्रेडाई नियमों में ढील नहीं, बल्कि एक्ट के अनुरूप स्पष्ट, समयबद्ध और समान प्रक्रिया की मांग कर रहा है।
चेयरमैन ने समाधान का भरोसा दिया
रेरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने प्रतिनिधिमंडल के सभी बिंदुओं को सुना। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण कई रिफॉर्म पर काम शुरू कर चुका है। कुछ विषयों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया। उन्होंने कानून के अनुरूप व्यावहारिक समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। प्रतिनिधिमंडल ने रेरा के तकनीकी सदस्य संजय गुप्ता से भी मुलाकात की। उन्होंने भी व्यावहारिक समाधान की दिशा में सकारात्मक रुख का आश्वासन दिया।
‘कमाल का भोपाल’ अभियान के तहत पुस्तकें भेंट
मुलाकात के दौरान ‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के तहत रेरा चेयरमैन को भोपाल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशेषताओं पर आधारित पुस्तकें भेंट की गईं। इसके अलावा राजा भोज द्वारा रचित नगर नियोजन से संबंधित ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ और राजा भोज की प्रतिमा भी दी गई। चेयरमैन ने भोपाल से जुड़ी इस बौद्धिक सामग्री की सराहना की।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे मौजूद
प्रतिनिधिमंडल में विपिन गोयल, सुनील गुप्ता, अजय शर्मा, समीर सबरवाल, दिनेश गोयल, जयंत भंडारी, आकाश क्षिंगन और क्रेडाई ग्वालियर अध्यक्ष सुदर्शन झंवर शामिल रहे।

