MP Promotion Rules 2025: दस साल बाद शुरू हुई प्रमोशन प्रक्रिया पर विवाद, नियमों की अनदेखी के आरोप; हजारों कर्मचारी प्रभावित

मध्यप्रदेश में 10 साल बाद शुरू हुई सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में है। MP Promotion Rules 2025, GAD निर्देश और DPC प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।

MP Promotion Rules 2025: दस साल बाद शुरू हुई प्रमोशन प्रक्रिया पर विवाद, नियमों की अनदेखी के आरोप; हजारों कर्मचारी प्रभावित

भोपाल। दस साल के लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश में शुरू हुई प्रमोशन की प्रकिया विवादों में घिर गई है. गृह विभाग के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति नियम-2025 के नियमों और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. अधिकारियों का दावा है कि इसकी वजह से सामान्य वर्ग के साथ-साथ SC-ST वर्ग के भी कई पात्र कर्मचारी और अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए हैं.   

क्या है पूरा मामला?

दरअसल मध्य प्रदेश में लंबे समय से पदोन्नति का मामला कानूनी विवादों के चलते अटका हुआ था. 2025 में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद, लंबे समय से अटकी प्रकिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला और करीब दस साल बाद सरकारी विभागों में प्रमोशन की प्रकिया शुरू हुई. हालांकि, अब इसी प्रक्रिया के तरीके पर  सवाल उठ रहे हैं.

पहले कमर्शियल टैक्स विभाग से शिकायत सामने आई थी. इसके बाद गृह विभाग के अधिकारियों ने भी वरिष्ठ अधिकारियों और विभाग की सचिव के सामने शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया है कि लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 की कंडिका-6 के अनुसार लंबित चयन वर्षों को पहले निपटाया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

नियम-2025 की कंडिका-6 में क्या है?

शिकायत करने वाले अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी चयन वर्ष में विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की बैठक समय पर नहीं हो पाती है, तो अगली DPC में सबसे पहले उसी लंबित वर्ष के लिए अलग चयन सूची तैयार की जानी चाहिए. इसके बाद ही वर्तमान और आगामी रिक्तियों के लिए नई चयन सूची तैयार करने का प्रावधान है. आरोप है कि कई विभागों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बाद के वर्षों की रिक्तियों के आधार पर सीधे पदोन्नति आदेश जारी कर दिए गए. इससे 2025 में पात्र हुए कई कर्मचारी प्रमोशन की सूची से बाहर हो गए.

GAD ने पहले ही जारी किया था स्पष्टीकरण

सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 जारी किए थे. इसके बाद 30 जून 2025 को DPC में किन वर्षों की गोपनीय चरित्रावली यानी CR को आधार बनाया जाएगा, इसे लेकर स्पष्टीकरण भी जारी किया गया था. स्पष्टीकरण के मुताबिक अलग-अलग DPC के लिए अलग-अलग वर्षों की CR को आधार बनाने की व्यवस्था तय की गई थी. आरोप लगाने वाले अधिकारियों का कहना है कि इसके बावजूद कई जगह नियमों और GAD के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया नहीं अपनाई गई.

पुलिस विभाग में करीब 25 हजार प्रमोशन, फिर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में पुलिस विभाग सबसे ज्यादा चर्चा में है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पुलिस महकमे में करीब 25 हजार पदोन्नतियां की गई हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पुलिस में हुई बड़ी संख्या में पदोन्नतियों की सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं. अब इसी प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों के वंचित रह जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अधिकारी कोर्ट जाने की तैयारी में

पदोन्नति से वंचित अधिकारियों की मांग है कि पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और नियमों के मुताबिक संशोधित आदेश जारी किए जाएं. शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे. हालांकि, दूसरी ओर जुलाई 2026 में GAD ने पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे. सरकार के कानूनी पक्ष के मुताबिक 2025 के पदोन्नति नियमों पर हाईकोर्ट की ओर से कोई अंतरिम रोक नहीं है और DPC गठित कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है. साथ ही होने वाली पदोन्नतियां लंबित मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसलों के अधीन रहेंगी. फिलहाल MP Promotion Rules 2025 को लेकर विवाद का केंद्र यही है कि DPC में लंबित वर्षों और नई रिक्तियों को लेकर नियमों की व्याख्या और उनका पालन किस तरह किया गया. आने वाले समय में सरकार के स्तर पर समीक्षा या न्यायालय में होने वाली सुनवाई से इस विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है.