NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, 20 हजार पन्नों की चार्जशीट में 13 आरोपी
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट में 13 आरोपियों, 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 अहम साक्ष्यों का उल्लेख है। जांच में NTA विशेषज्ञों, कोचिंग संस्थानों, बिचौलियों और उम्मीदवारों के कथित नेटवर्क, डिजिटल सबूत और परीक्षा सुरक्षा की कमियों से जुड़े कई गंभीर दावे सामने आए हैं। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अदालत में अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर जांच की कई अहम कड़ियां सामने रखी हैं। CBI के मुताबिक यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि NTA से जुड़े विशेषज्ञों, कोचिंग संस्थान, बिचौलियों और उम्मीदवारों से जुड़ा कथित बहु-स्तरीय नेटवर्क था। चार्जशीट में 13 आरोपियों, 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 महत्वपूर्ण साक्ष्यों का उल्लेख है।
3 मई को हुई थी परीक्षा, बाद में रद्द करनी पड़ी
NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र के कथित तौर पर बाहर पहुंचने की जानकारी सामने आने लगी थी। राजस्थान के सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने 7 मई को NTA को ई-मेल भेजकर कथित लीक की जानकारी दी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और CBI ने 12 मई को जांच अपने हाथ में ली। बाद में 3 मई की परीक्षा रद्द कर प्रभावित उम्मीदवारों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई।
सवालों तक पहुंच कैसे बनी?
CBI की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा NTA के subject experts से जुड़ा है। चार्जशीट में तीन NTA विशेषज्ञों—प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और मनीषा संजय हवलदार—को आरोपी बनाया गया है। CBI का आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने गोपनीयता की शर्तों का उल्लंघन कर परीक्षा से जुड़े प्रश्नों को कथित तौर पर बाहर पहुंचाया।
CBI के अनुसार कुछ मामलों में पूरा प्रश्नपत्र देने के बजाय प्रश्नों को याद करवाकर या लिखवाकर उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया। महाराष्ट्र के लातूर में सामने आए मामले में कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के मोबाइल से 132 हस्तलिखित Chemistry प्रश्नों की तस्वीरें मिलने का दावा किया गया। इनमें से 111 प्रश्न NTA के मास्टर प्रश्नपत्रों से मेल खाने की बात CBI ने कही है। तस्वीरों का मेटाडाटा भी परीक्षा से करीब 10 दिन पहले का बताया गया।
₹5 लाख में सवाल लेने का आरोप
CBI के मुताबिक लातूर के कोचिंग सेंटर संचालक ने कथित तौर पर ₹5 लाख देकर Chemistry के प्रश्न हासिल किए। एजेंसी का आरोप है कि NTA पैनल के सदस्य रहे P.V. Kulkarni तक पहुंच बनाने में डॉक्टर और अन्य बिचौलियों की भूमिका रही। जांच में पैसे के लेन-देन और उससे जुड़े डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों को भी शामिल किया गया है।
निजी कोचिंग से कनेक्शन भी जांच में
CBI ने विशेषज्ञों के निजी कोचिंग कनेक्शन को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया है। आरोप है कि कुछ विशेषज्ञ परीक्षा से जुड़े संवेदनशील काम के साथ-साथ निजी तौर पर विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे और इसी संपर्क का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल हुआ।
परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
CBI ने केवल पेपर लीक करने वालों की भूमिका ही नहीं, बल्कि NTA की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों की भी जांच की। एजेंसी ने कथित तौर पर NTA के confidential section में फ्रिस्किंग और पर्याप्त जांच की कमी, CCTV कवरेज से जुड़ी कमियां और प्रश्नपत्र तैयार करने तथा अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में एक ही समूह के लोगों की बार-बार भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए हैं।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की क्षमता पर भी सवाल
चार्जशीट से जुड़े बयानों में CCTV व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। NTA की कंसल्टेंट शिल्पी शर्मा के बयान के मुताबिक गेट पर सुरक्षा कर्मी उम्मीदवारों से मोबाइल, पेन ड्राइव आदि के बारे में पूछते थे और बाहर का सामान निर्धारित स्थान पर रखा जाता था।
वहीं CCTV व्यवस्था को लेकर एक अन्य कंसल्टेंट के बयान में बताया गया कि CCTV स्टोरेज बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन सिस्टम लगभग 25 दिनों तक ही फुटेज सुरक्षित रख सकता था। ऐसे में घटना के बाद पुराने फुटेज की जांच और उसे सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी जांच का विषय बनी।
WhatsApp, Telegram और डिजिटल सबूत
CBI ने जांच में WhatsApp चैट, Telegram संदेश, PDF फाइल, मोबाइल फोन, CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया है। इन साक्ष्यों के जरिए कथित तौर पर आरोपियों के बीच संपर्क, प्रश्नों की आवाजाही और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा गया।
13 आरोपी, जांच अभी भी महत्वपूर्ण मोड़ पर
CBI की चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें NTA से जुड़े तीन subject experts, कोचिंग संस्थान से जुड़े लोग, एक डॉक्टर और कथित बिचौलिये शामिल हैं। एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ BNS, Prevention of Corruption Act और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act के तहत धाराएं लगाई हैं।
सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने NEET जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की प्रश्नपत्र सुरक्षा, विशेषज्ञों की गोपनीयता, CCTV निगरानी, परीक्षा सामग्री की आवाजाही और निजी कोचिंग से जुड़े हितों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CBI की जांच का दावा है कि कथित नेटवर्क ने परीक्षा की गोपनीयता को कई स्तरों पर प्रभावित किया।
हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अदालत में अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। आरोपियों को दोषी तभी माना जाएगा, जब अदालत में आरोप साबित हो जाएं।
Varsha Shrivastava 
