स्मार्ट सिटी भोपाल की बदहाल तस्वीर! बारिश में डूबी सड़कें, घरों तक पहुंचा पानी
राजधानी के कई इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित, लोगों का सवाल—हर साल बारिश में यही हालात तो स्थायी समाधान कब?
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बारिश ने एक बार फिर शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। सोमवार को हुई बारिश के बाद राजधानी के कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। कई रिहायशी क्षेत्रों में घरों के सामने जलभराव की स्थिति बन गई, जबकि कुछ जगहों पर बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया। हालात ऐसे रहे कि लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा।

बारिश के बाद सामने आई तस्वीरें राजधानी के स्मार्ट सिटी होने के दावों पर सवाल खड़े करती नजर आईं। जिन सड़कों पर सामान्य दिनों में वाहनों की आवाजाही रहती है, वहां पानी जमा होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सड़कें बनीं तालाब, घरों के सामने भरा पानी
राजधानी के कई इलाकों में बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। कुछ स्थानों पर सड़क और पानी के बीच अंतर करना तक मुश्किल नजर आया। वाहन चालक पानी के बीच से निकलने को मजबूर हुए, वहीं पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी परेशानी हुई।

रिहायशी इलाकों में स्थिति और गंभीर दिखाई दी। घरों के बाहर पानी जमा होने से लोगों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को पानी घर के अंदर पहुंचने की चिंता सताती रही।
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
जलभराव का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ा। काम पर जाने वाले लोगों से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों तक को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की रहती है कि पानी घरों के अंदर न पहुंच जाए। कई परिवारों को जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर रखना पड़ता है।

लोगों का दावा—कई सालों से बनी हुई है समस्या
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब बारिश के बाद इलाके में जलभराव हुआ हो। लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों से बारिश के दौरान इसी तरह के हालात बनते हैं। कई लोगों ने दावा किया कि उनके इलाके में दो-तीन साल से नहीं बल्कि करीब 10 साल से बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी हुई है।

बारिश आती है, सड़कें डूबती हैं, घरों के सामने पानी जमा होता है और लोग प्रशासन से राहत की उम्मीद करते हैं। बारिश खत्म होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है, लेकिन अगली बारिश में समस्या फिर सामने आ जाती है।

जब समस्या हर साल है तो समाधान क्यों नहीं?
भोपाल में मानसून हर साल आता है और बारिश भी हर साल होती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन इलाकों में लगातार जलभराव होता है, वहां स्थायी जल निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही? क्या जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर मानसून से पहले पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं? क्या नालों की सफाई और उनकी क्षमता पर्याप्त है? क्या बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त रास्ते मौजूद हैं? और अगर किसी इलाके में पिछले कई सालों से एक जैसी समस्या सामने आ रही है, तो उसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?

सिर्फ पानी निकालना नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन सिर्फ बारिश के दौरान पानी निकालने तक सीमित न रहे, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करे। लोग चाहते हैं कि जिन इलाकों में हर साल पानी भरता है, वहां जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाए, नालों की नियमित सफाई हो और जरूरत के मुताबिक नए ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था की जाए।

स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बड़ा सवाल
भोपाल को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए कई योजनाएं और परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में सामने आने वाली जलभराव की तस्वीरें बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर सवाल खड़े करती हैं।

सवाल यह नहीं है कि बारिश क्यों हुई।
सवाल यह है कि बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई? आज पानी उतर जाएगा। सड़कें फिर दिखाई देने लगेंगी और जिंदगी सामान्य हो जाएगी। लेकिन अगर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो अगली बारिश में तस्वीर फिर वही हो सकती है।

अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन और नगर निगम जलभराव की समस्या से क्या सबक लेते हैं और क्या अगले मानसून से पहले उन इलाकों के लिए स्थायी समाधान तैयार किया जाता है, जहां हर साल बारिश के बाद लोगों को इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है।
Varsha Shrivastava 
