21 हजार फीट की ऊंचाई पर लहराया तिरंगा, भोपाल की 56 वर्षीय सुनीता सिंह ने रचा गौरव का नया अध्याय

भोपाल की 56 वर्षीय सुनीता सिंह ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 6,111 मीटर ऊंचे माउंट युनाम पर तिरंगा फहराकर शहर और मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाया।

21 हजार फीट की ऊंचाई पर लहराया तिरंगा, भोपाल की 56 वर्षीय सुनीता सिंह ने रचा गौरव का नया अध्याय

भोपाल। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल की 56 साल की पर्वतारोही सुनीता सिंह ने देश और शहर का नाम रोशन किया है. उन्होंने 15 अगस्त 2026 को सुबह 9:16 बजे करीब 21 हजार फीट (6,111 मीटर) ऊंचे माउंट युनाम के शिखर पर तिरंगा फहराया. सुनीता सिंह ने यहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ध्वज भी फहराया.

माउंट युनाम लाहौल-स्पीति घाटी में मनाली-लेह राजमार्ग पर बरालाचा ला दर्रे के पास स्थित है. पथरीली संरचना, खड़ी चढ़ाई और बर्फीले रास्तों के कारण इसे चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है. ऐसे में 56 साल की उम्र में सुनीता सिंह का इस चोटी को फतह करना खास उपलब्धि है.

स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे को दी सलामी

सुनीता सिंह भोपाल स्थित स्टेट बैंक मुख्यालय में असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) के पद पर कार्यरत हैं. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर माउंट युनाम पर तिरंगा फहराने के साथ उन्होंने SBI का ध्वज भी लहराया. उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को साहस, सेवा और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को समर्पित किया. उनका कहना है कि यह अभियान स्वतंत्रता दिवस के साथ देश के दुर्गम क्षेत्रों में भी बैंक की मौजूदगी और राष्ट्रीय भावना को दर्शाने का प्रयास था.

पहले भी कई ऊंची चोटियों पर फहरा चुकी हैं तिरंगा

सुनीता सिंह के लिए पर्वतारोहण का यह पहला बड़ा अभियान नहीं है. इससे पहले वह नेपाल की 6,476 मीटर ऊंची मेरा पीक और 6,119 मीटर ऊंची लोबुचे ईस्ट चोटी पर दो बार सफलता हासिल कर चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने रूस के माउंट एल्ब्रुस और अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो पर भी तिरंगा फहराया है. सुनीता सिंह माउंट एवरेस्ट पर 7,200 मीटर और अर्जेंटीना के माउंट एकॉनकागुआ पर 6,700 मीटर तक पर्वतारोहण कर चुकी हैं.

‘हर चढ़ाई खुद को मजबूत बनाने की कहानी’

सुनीता सिंह का मानना है कि पर्वतारोहण सिर्फ ऊंचाइयों को छूने का सफर नहीं है. हर चढ़ाई इंसान को नई चुनौतियों से सीखने और खुद को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने का मौका देती है. उनके मुताबिक, एक शिखर पर पहुंचने के बाद अगली चुनौती के लिए खुद को तैयार करना ही इस सफर की असली खूबसूरती है.