मऊगंज-रीवा में अवैध शराब कारोबार का जाल, आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

आबकारी नियमों की उड़ी धज्जियां: देवतालाब और मऊगंज विधानसभा क्षेत्र में  गांव-गांव फैला शराब का अवैध नेटवर्क, कानून को ताक में रखकर ओवर रेटिंग पर परोसी जा रही शराब

मऊगंज-रीवा में अवैध शराब कारोबार का जाल, आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मऊगंज से रिपोर्टर राजेंद्र पयासी। मध्य प्रदेश के मऊगंज और रीवा जिलों के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों—देवतालाब, मऊगंज, मनगवां और त्योंथर—में अवैध शराब कारोबार के व्यापक नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और रिपोर्टों के अनुसार, इन इलाकों में सरकारी शराब दुकानों के अलावा गांव-गांव तक “पैकारी” के माध्यम से शराब की अवैध सप्लाई की जा रही है।

आरोप है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें ठेकेदारों, स्थानीय स्तर के सप्लायरों और कुछ कथित तौर पर लापरवाह अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई गांवों को अवैध शराब बिक्री के हब के रूप में चिन्हित किया जा रहा है, जहां बिना किसी रोक-टोक के शराब की बिक्री जारी है।

ग्रामीण इलाकों में सप्लाई और ओवर-रेटिंग के आरोप

जानकारी के अनुसार, मुख्य शराब दुकानों से शराब की खेप अवैध रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही है। मऊगंज क्षेत्र के हाटा, लोढ़ी और पिपराही से लेकर देवतालाब क्षेत्र के सीतापुर, ढेरा और रजगवां तक अवैध बिक्री केंद्र सक्रिय बताए जा रहे हैं। इसी तरह मनगवां और त्योंथर क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर अवैध शराब और कोरेक्स जैसी नशीली वस्तुओं का कारोबार होने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और स्थानीय कानून व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई सरकारी शराब दुकानों में निर्धारित कीमतों से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। शासन द्वारा तय किए गए प्रिंट रेट और नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। सरकारी नियमों के अनुसार शराब की बिक्री केवल निर्धारित दुकान परिसर के भीतर और तय रेट पर ही की जानी चाहिए, लेकिन आरोप है कि कई स्थानों पर नियमों का उल्लंघन करते हुए खुलेआम बिक्री हो रही है। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है और कई बार विवाद की स्थिति भी बन रही है।

प्रशासनिक की कार्रवाई पर सवाल, नशे की लत से बढ़ते हादसे

आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारी समय-समय पर औपचारिक निरीक्षण करते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है। आरोप यह भी है कि कार्रवाई केवल कुछ समय के लिए की जाती है, जिसके बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। इससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद होते हैं और वे गांव-गांव तक अपने नेटवर्क को फैलाते जाते हैं।

वहीं, अवैध शराब कारोबार के बढ़ने से क्षेत्र में सामाजिक समस्याएं भी बढ़ने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार नशे की लत के कारण कई परिवारों में विवाद और टूटन की स्थिति पैदा हो रही है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका सामाजिक असर और गंभीर हो सकता है।

अधिकारियों का पक्ष और जांच के निर्देश

मऊगंज के अपर कलेक्टर पीके पांडेय ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि शराब दुकानों में ओवर-रेटिंग की शिकायतें संज्ञान में आई हैं। उन्होंने आबकारी विभाग को निर्देश दिए हैं कि सभी दुकानों का निरीक्षण किया जाए और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में प्रिंट रेट से अधिक वसूली या अन्य अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, नईगढ़ी थाना क्षेत्र में भी अवैध पैकारी संचालन को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उच्च अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी बीच, पूरे रीवा जोन में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ “ऑपरेशन प्रहार-2” चलाया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि इसके बावजूद कई अवैध अड्डे अभी भी सक्रिय हैं।