Indore News : सफाई कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगें अब भी बरकरार, 5-6 अक्टूबर को किया था प्रदर्शन

Indore Sanitation Workers Strike : कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए। 5 और 6 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के जरिए उन्होंने अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की थी।

Indore News : सफाई कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगें अब भी बरकरार, 5-6 अक्टूबर को किया था प्रदर्शन

Indore Sanitation Workers Strike :  मध्य प्रदेश। इंदौर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने वाले सफाई कर्मचारी आज खुद अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। स्थायीकरण, वेतन वृद्धि, पीएफ और ईएसआई की सुविधा से लेकर सुरक्षा उपकरणों की कमी तक, कर्मचारियों की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। इन्हीं मांगों को लेकर 5 और 6 अक्टूबर को सफाई कर्मचारियों ने पांच दिवसीय काम बंद हड़ताल के तहत प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज उठाई और शासन-प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान महिला सफाई कर्मचारियों ने भी अपनी परेशानी बयां करते हुए बताया कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। सवाल यह है कि शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने वाले इन कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा।

कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा 

इंदौर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उनकी सबसे बड़ी मांग वर्ष 2016 और उससे पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी करने की है। इसके साथ ही ठेका व्यवस्था के बजाय नगर निगम में नियमित भर्ती शुरू करने की मांग भी उठाई गई। 

कर्मचारियों का कहना है कि कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। करीब 10 हजार से 20 हजार रुपये तक मिलने वाले वेतन में मकान का किराया, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च पूरे करना चुनौती बन गया है। कर्मचारियों ने पीएफ और ईएसआई से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी मांग की है।

20 साल नौकरी के बाद भी स्थायी होने की मांग पूरी नहीं 

महिला सफाई कर्मचारियों की शिकायतें भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा हैं। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि उन्हें काम करते हुए करीब 20 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी होने की मांग पूरी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बैंक खाते में करीब 20 से 22 हजार रुपये तक मिलने के बावजूद घरेलू खर्च चलाना मुश्किल होता है। 

वहीं, वर्ष 2012 से काम कर रही एक अन्य महिला कर्मचारी ने सुरक्षा उपकरणों की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि हाथों में पहनने के लिए ग्लव्स समय पर नहीं मिलते और दी जाने वाली ड्रेस भी कई बार काम करने के लिहाज से सुविधाजनक नहीं होती। कर्मचारियों के अनुसार, पहले नियमित रूप से मिलने वाले सुरक्षा उपकरण पिछले चार से पांच वर्षों से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। 

वहीं कर्मचारी प्रतिनिधियों के मुताबिक, उनकी कुछ स्थानीय समस्याओं को लेकर नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर ने संज्ञान लिया है और उनके समाधान की दिशा में काम शुरू किया गया है। हालांकि, स्थायीकरण, नियमित भर्ती और सेवा संबंधी कई मांगें शासन स्तर से पूरी होनी हैं। इन्हें लेकर लगातार पत्राचार किए जाने की बात कही जा रही है। 

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए। 5 और 6 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के जरिए उन्होंने अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की थी। अब उनकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 11 सूत्रीय मांगों में से कितनी मांगों पर निर्णय होता है और वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नौकरी, बेहतर वेतन और जरूरी सुविधाएं कब मिलती हैं।