20 मई से स्थानांतरण पर लगा प्रतिबंध हटने के आसार, आपसी सहमति के आधार पर होने वाले तबादलों पर नहीं होगी बंदिश

तय सीमा का असर भी आपसी सहमति वाले तबादलों पर नहीं होगा, मंत्रियों को रहेगी छूट

20 मई से स्थानांतरण पर लगा प्रतिबंध हटने के आसार, आपसी सहमति के आधार पर होने वाले तबादलों पर नहीं होगी बंदिश

भोपाल। मध्यप्रदेश में तबादलों पर लगी बंदिश बीस मई के बाद हटने के आसार हैं। इस आशय के संकेत एक दिन पहले हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मिले हैं। तबादलों को लेकर बनाए जाने वाले नियम का मसौदा लगभग तैयार कर लिया गया है। अब इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहमति का इंतजार है। तय किया गया है कि आपसी सहमति के आधार पर होने वाले तबादलों की सीमा बढ़ाई जाएगी। मंत्रियों की चाहत यह भी है कि आपसी सहमति के तबादलों पर बंदिश नहीं लगाई जाए। यानी आपसी सहमति के आधार पर होने वाले तबादलों को लेकर सीमा तय नहीं की जाए।

सामान्य तौर पर सरकार की ओर से जब तबादलों को लेकर आदेश जारी किया जाता है, तो उसमें दस प्रतिशत की सीमा तय कर दी जाती है। यानी तबादले दस प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे। इस बार आपसी सहमति के तबादलों में ऐसा नहीं होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने के साथ-साथ निर्माण कार्यों में बढ़ती लागत से परेशान ठेकेदारों को राहत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

सरकार का मानना है कि इन फैसलों का उद्देश्य आम लोगों को राहत देना है और दूसरी ओर अधोसंरचना परियोजनाओं को बिना रुकावट आगे बढ़ाना भी है। कैबिनेट ने राज्य मंत्रियों के स्वेच्छानुदान की सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। पहले मंत्री जरूरतमंद लोगों को अधिकतम 16 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद दे सकते थे, लेकिन अब यह राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर जरूरतमंद लोगों को तत्काल सहायता मिल सकेगी।

डामर की बढ़ती कीमत का भार उठाएगी सरकार

लोक निर्माण विभाग के तहत चल रहे सड़क और अन्य निर्माण कार्यों को लेकर भी कैबिनेट ने अहम निर्णय लिया। बिटुमिन (डामर) की लगातार बढ़ती कीमतों से निर्माण लागत बढ़ रही थी, जिससे छोटे और मध्यम ठेकेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। अब सरकार ने तय किया है कि 10 करोड़ रुपये तक की लागत वाले निर्माण कार्यों में डामर की बढ़ी हुई कीमत का अतिरिक्त भार सरकार वहन करेगी। इससे ठेकेदारों को राहत मिलने के साथ विकास कार्यों की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

खुमानसिंह शिवाजी जलाशय परियोजना के विस्तार को मंजूरी

कैबिनेट ने नीमच जिले की खुमानसिंह शिवाजी जलाशय परियोजना के विस्तार को मंजूरी दे दी है। योजना के तहत जलाशय की ऊंचाई बढ़ाने के साथ नई पाइपलाइन और आधुनिक प्रेशराइज्ड सिंचाई सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 163 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र के 22 गांवों के लगभग 6,500 किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे करीब 5,200 हेक्टेयर कृषि भूमि को फायदा पहुंचने की उम्मीद है और किसानों की खेती अधिक उत्पादक बन सकेगी।

29 हजार करोड़ से ज्यादा की योजनाओं को हरी झंडी

कैबिनेट बैठक में विभिन्न विभागों की कई बड़ी परियोजनाओं और योजनाओं की निरंतरता को भी मंजूरी दी गई। कुल मिलाकर 29,540 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें सड़क निर्माण, शहरी अधोसंरचना और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रमुख हैं। लोक वित्त पोषित परियोजनाओं के अलावा शहरी क्षेत्रों में सड़क विकास के लिए भी बड़ी राशि मंजूर की गई है। वहीं वृद्धजन पेंशन योजनाओं के लिए भी हजारों करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

बुधनी मेडिकल कॉलेज परियोजना की लागत बढ़ी

कैबिनेट ने बुधनी में प्रस्तावित 100 सीटों वाले एमबीबीएस कॉलेज की संशोधित लागत को भी मंजूरी दी। निर्माण और अन्य खर्च बढ़ने के कारण परियोजना की लागत में इजाफा किया गया है। सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने से क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा को मजबूती मिलेगी।

बुजुर्गों की पेंशन के लिए 6 हजार करोड़

गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बुजुर्गों की पेंशन योजना को जारी रखने के लिए 6,115 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। जबलपुर हाईकोर्ट के सामने मल्टीलेवल वाहन पार्किंग और बार ऑफिस निर्माण परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे