नर्मदा घाट पर 343 वोटर ID कार्ड मिलने से उठे सवाल: कांग्रेस ने की FIR की मांग
खरगोन के मंडलेश्वर में नर्मदा घाट पर 343 मतदाता पहचान पत्र मिले। शुरुआती जानकारी में कार्ड इंदौर की राऊ विधानसभा से जुड़े बताए गए हैं। कांग्रेस ने जांच और FIR की मांग की।
खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे मिले 343 मतदाता पहचान पत्रों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये कार्ड इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से जुड़े हैं। मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने पुलिस से शिकायत कर जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सफाई अभियान के दौरान सामने आया मामला
रविवार को मंडलेश्वर के नर्मदा घाट पर सफाई अभियान के दौरान स्वयंसेवकों को पानी में तैरते और किनारे पड़े मतदाता पहचान पत्र दिखाई दिए। कार्डों पर इंदौर के तिलक नगर, आस्था पैलेस और आसपास के इलाकों के पते दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
नर्मदा जी में तैरते मिले सैकड़ों वोटर ID कार्ड...! https://t.co/H2HELzr6vO
— Rupesh Mishra (@rupeshmishramp) October 25, 2026
घटना की सूचना मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्डों को जब्त किया और पंचनामा तैयार किया। अब इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उनके घाट तक पहुंचने के कारणों की जांच की जा रही है।
कांग्रेस ने निर्वाचन व्यवस्था पर उठाए सवाल
मामले को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मंडलेश्वर थाने पहुंचे। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि दूसरे शहर के मतदाताओं से जुड़े इतने सारे पहचान पत्र एक ही स्थान पर कैसे मिले।
कांग्रेस ने इस मामले को कथित वोट चोरी से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता पहचान पत्रों के स्रोत और उनकी स्थिति की जांच कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाना चाहिए।
FIR दर्ज नहीं हुई तो घेराव की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी कार्यकर्ता थाने का घेराव करेंगे। कांग्रेस ने नदी में और भी पहचान पत्र होने की आशंका के मद्देनजर तलाशी कराने की मांग भी उठाई है।
वहीं, पुलिस के अनुसार मामले में कांग्रेस की शिकायत प्राप्त हुई है और थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ये पहचान पत्र नर्मदा घाट तक कैसे पहुंचे और इन्हें वहां किसने छोड़ा। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

