केन-बेतवा परियोजना पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, आदिवासी आंदोलन के समर्थन में उतरे

केन-बेतवा परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर में आदिवासी आंदोलन जारी है. राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आंदोलन का समर्थन किया.

केन-बेतवा परियोजना पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, आदिवासी आंदोलन के समर्थन में उतरे

भोपाल। मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहे आदिवासी आंदोलन का मुद्दा अब सियासी तकरार का विषय बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के समर्थन में आवाज उठाते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी जमीन और पुनर्वास के अधिकार को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों की आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की जा रही है। 

जमीन और मुआवजे को लेकर विरोध

केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित छतरपुर और आसपास के इलाकों के आदिवासी परिवार मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। प्रदर्शन के दौरान जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल और अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के बावजूद उन्हें उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला।

जुलाई में छतरपुर जिले में करीब 15-17 दिन चले आंदोलन के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया था। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को भी अस्पताल ले जाया गया था।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि केन-बेतवा परियोजना के लिए आदिवासी परिवारों की जमीन ली गई, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस बल के जरिए दबाया जा रहा है।

राहुल गांधी ने प्रभावित लोगों के लिए उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि कांग्रेस प्रभावित समुदायों के न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहेगी।

क्या है केन-बेतवा परियोजना?

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली प्रमुख अंतर-बेसिन नदी जोड़ परियोजना है। इसके तहत मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की ओर बहने वाली बेतवा नदी तक पहुंचाने की योजना है। करीब 44,605 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ाना है।

परियोजना को लेकर सरकार इसे बुंदेलखंड के लिए पानी और सिंचाई की बड़ी पहल बता रही है, जबकि प्रभावित समुदाय जमीन, मुआवजे, पुनर्वास और अपने अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बना

केन-बेतवा परियोजना को लेकर कांग्रेस पहले भी विधानसभा में सरकार को घेरने की तैयारी कर चुकी है। पार्टी ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा सदन में उठाने की बात कही थी।

ऐसे में राहुल गांधी के बयान के बाद केन-बेतवा परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं। एक तरफ सरकार परियोजना को बुंदेलखंड के विकास और जल संकट के समाधान से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ प्रभावित आदिवासी परिवार अपने मुआवजे, पुनर्वास और जमीन के अधिकार को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।