FSTP पर सवालों का अंबार : मशीनों से भुगतान तक उठे प्रश्न, निगम कमिश्नर, निगमाध्यक्ष और महापौर की चुप्पी चर्चा में
Singrauli FSTP Plant : सिंगरौली नगर निगम के FSTP प्लांट के संचालन, मशीनों की स्थिति और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। जांच के आश्वासन के बाद अब दस्तावेजों की पड़ताल और आधिकारिक जवाब का इंतजार है।
Singrauli FSTP Plant : सिंगरौली। नगर निगम सिंगरौली के फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) से जुड़े कार्यों की निगरानी, मशीनों के संचालन और भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इन सवालों के बीच नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों, निगमाध्यक्ष और महापौर की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर जिस परियोजना में सरकारी धन खर्च हो रहा है, उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद जवाब देने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या जांच और जवाबदेही केवल आश्वासन तक सीमित रहेगी, या नगर निगम प्रशासन तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करेगा?
मशीनों के संचालन और निगरानी पर सवाल
स्वतंत्र इंजीनियर भूपेश राणा और सत्य प्रकाश की जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, अजय प्रताप सिंह की दिल्ली से मॉनिटरिंग किए जाने की चर्चा के बीच यह स्पष्ट होना जरूरी है कि प्लांट के काम का भौतिक सत्यापन कौन करता है, निरीक्षण रिपोर्ट किस आधार पर तैयार होती है और भुगतान से पहले कार्य की गुणवत्ता की पुष्टि किस स्तर पर की जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन संबंधित दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
भुगतान प्रक्रिया और रिकॉर्ड की जांच जरूरी
सबसे बड़ा सवाल नगर निगम के जिम्मेदारों की चुप्पी पर है। यदि प्लांट का संचालन नियमों के अनुरूप हो रहा है और भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया है, तो प्रशासन को निरीक्षण रिपोर्ट, कार्यादेश और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने में संकोच क्यों होना चाहिए? और यदि कहीं अनियमितता है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों होनी चाहिए?
नगर निगम के अधिकारियों के साथ निगमाध्यक्ष और महापौर की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। शहर की स्वच्छता व्यवस्था और सार्वजनिक धन से जुड़ा मामला होने के कारण नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस विषय पर क्या कदम उठा रहे हैं। उनकी चुप्पी को किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन उठते सवालों पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की जानकारी देना सार्वजनिक जवाबदेही का जरूरी हिस्सा है।
निगमाध्यक्ष ने दिया था जांच का आश्वासन
नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय ने मामले की जांच कराकर संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया था। अब देखना होगा कि जांच कब शुरू होती है, क्या उसमें FSTP की मशीनों की वास्तविक स्थिति, इंजीनियरों की निरीक्षण रिपोर्ट, ठेकेदार के बिल और भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया शामिल होती है, और क्या जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाते हैं।
सवाल सीधा है, मशीनें चल रही हैं या नहीं, भुगतान किस आधार पर हुआ और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब न तो अटकलों से मिलेगा और न ही चुप्पी से। इसके लिए निष्पक्ष जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और जिम्मेदारों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन, निगमाध्यक्ष और महापौर पर हैं। क्या वे सामने आकर स्थिति स्पष्ट करेंगे, या FSTP से जुड़े सवालों पर जनता को जवाब का इंतजार करना पड़ेगा? सरकारी धन के मामले में चुप्पी सवालों को खत्म नहीं करती - जवाबदेही ही उनका समाधान है।

