मानसून की बेरुखी: नहीं भरा तवा बांध, नहीं खुले गेट; सिंचाई और बिजली उत्पादन पर बढ़ी चिंता 

मानसून की बेरुखी से तवा बांध का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ा है। गेट बंद हैं, जिससे नर्मदापुरम और हरदा में सिंचाई तथा बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मानसून की बेरुखी: नहीं भरा तवा बांध, नहीं खुले गेट; सिंचाई और बिजली उत्पादन पर बढ़ी चिंता 
 
नर्मदापुरम। प्रदेश में मानसून के कमजोर पड़ने का असर अब बड़े जलाशयों पर भी दिखाई देने लगा है। नर्मदापुरम के महत्वपूर्ण तवा बांध का यह नजारा इसकी तस्वीर पेश कर रहा है। आमतौर पर बारिश के दिनों में जलस्तर बढ़ने के बाद जिस बांध से पानी छोड़े जाने और गेट खुलने की तस्वीरें सामने आती हैं, वहां इस बार पानी का स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ पाया है। तस्वीर में भी बांध के गेट बंद नजर आ रहे हैं और जलाशय का बड़ा हिस्सा पूरी क्षमता तक भरा हुआ दिखाई नहीं देता।

 
तवा बांध केवल पानी का विशाल भंडार नहीं है, बल्कि नर्मदापुरम और हरदा के बड़े कृषि क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था की अहम कड़ी है। तवा परियोजना का कल्टीवेबल कमांड एरिया करीब 2.468 लाख हेक्टेयर है। बांध से नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है, ऐसे में मानसून की कमी और जलाशय में कम पानी की स्थिति किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है।
 
तवा से कितनी बिजली बनती है

 
तवा बांध से जुड़ा हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्लांट 13.5 मेगावाट की स्थापित क्षमता का है। इसमें 6.75 मेगावाट की दो टर्बाइन लगी हैं। यानी अनुकूल जलस्तर और पानी के प्रवाह की स्थिति में दोनों यूनिट मिलकर करीब 13.5 मेगावाट तक बिजली उत्पादन कर सकती हैं। हालांकि वास्तविक उत्पादन लगातार एक जैसा नहीं रहता और पानी के प्रवाह तथा उपलब्ध हेड के अनुसार बदलता है।
 
गेट नहीं खुले तो क्या है इसका मतलब?
 
बांध के गेट खोलने का सीधा संबंध जलाशय में पानी की आवक और जलस्तर से होता है। जब लगातार बारिश और कैचमेंट से पानी की भारी आवक के कारण जलस्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचता है, तब अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से छोड़ा जाता है। लेकिन इस बार तवा बांध के पर्याप्त नहीं भरने के कारण वैसा दृश्य देखने को नहीं मिला, जब बारिश के मौसम में गेट खोलकर पानी नर्मदा की ओर छोड़ा जाता है।
 
उपलब्ध CWC-आधारित आंकड़ों के अनुसार 30 जुलाई 2026 को तवा जलाशय अपनी कुल क्षमता के करीब 13.6 प्रतिशत तक भरा था, जो उस समय सामान्य मानसूनी स्थिति की तुलना में काफी कम था।

तवा के पानी से दो जिलों की होती है जल आपूर्ति

तवा के पानी से नर्मदापुरम और हरदा जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। दोनों जिलों की खेती काफी हद तक तवा के जल पर निर्भर है। पानी की उपलब्धता को लेकर सिंचित किसानों की चिंता बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिला तो फसलों पर असर पड़ सकता है।

अब नजर अगले दौर की बारिश पर

तवा जलाशय तवा और देनवा नदियों के संगम क्षेत्र से जुड़ा है और इसका उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई के लिए किया जाता है, जबकि बाद में बिजली उत्पादन और मत्स्यपालन भी इसके प्रमुख उपयोगों में शामिल हुए।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मानसून के बचे हुए दिनों में क्या तवा बांध पर्याप्त रूप से भर पाएगा? क्योंकि बांध का जलस्तर केवल गेट खुलने या बंद रहने की तस्वीर नहीं बदलता, बल्कि इससे लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई, बिजली उत्पादन और पूरे क्षेत्र की जल प्रबंधन व्यवस्था भी जुड़ी हुई है।
 
तवा के गेट इस बार कब खुलेंगे, इसका जवाब अब आने वाली बारिश और बांध के कैचमेंट में होने वाली पानी की आवक पर टिका है।