भोपाल नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप मैकेनिकल पर लोकायुक्त का छापा, फर्जी बिलिंग मामले की जांच तेज
फाइनेंशियल गड़बड़ियों को लेकर भोपाल नगर निगम में लोकायुक्त की टीम ने सेंट्रल वर्क शॉप माता मंदिर के करीब स्थित नगर निगम के ऑफिस में छापा मारा।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में नगर निगम से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई तेज हो गई है। रविवार सुबह करीब 9 बजे लोकायुक्त पुलिस की टीम ने माता मंदिर के पास स्थित नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप के कार्यालय पर छापा मारा। यह कार्रवाई फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान के आरोपों की जांच के तहत की जा रही है। टीम फिलहाल कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों की जांच कर रही है और कर्मचारियों से पूछताछ भी जारी है।

बताया जा रहा है कि नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप में निगम के वाहनों की मरम्मत और मैकेनिकल से जुड़े काम किए जाते हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई मामलों में बिना काम कराए ही सॉफ्टवेयर के माध्यम से फर्जी ई-बिल तैयार कर भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान कराया गया।
दो दिन पहले नगर निगम के डाटा सेंटर पर भी पड़ा था छापा
इस मामले में लोकायुक्त पुलिस को नवंबर 2025 में शिकायत मिली थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 11 मार्च को नगर निगम के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की कार्रवाई शुरू की गई।
लोकायुक्त टीम ने दो दिन पहले शुक्रवार को फतेहगढ़ स्थित नगर निगम के डाटा सेंटर पर भी छापा मारकर करीब दस वर्षों के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त किया था। साथ ही भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी कब्जे में लिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ था या नहीं।
इस मामले में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का कहना है कि बिल संबंधित विभागों के सत्यापन के बाद ही लेखा शाखा में आते हैं और फंड की उपलब्धता के आधार पर आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है। फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
Varsha Shrivastava 
