EOW ने नरसिंहपुर में स्टाम्प और डायवर्जन शुल्क में हेराफेरी के आरोप में बिल्डर और अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की

EOW जबलपुर ने नरसिंहपुर जिले में लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में कार्रवाई करते हुए मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

EOW ने नरसिंहपुर में स्टाम्प और डायवर्जन शुल्क में हेराफेरी के आरोप में बिल्डर और अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की

जबलपुर। EOW जबलपुर ने नरसिंहपुर जिले में लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में कार्रवाई करते हुए मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। FIR में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के डायरेक्टर सुभाष त्यागी ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर ग्राम बंधी (एनएच-12 जबलपुर-भोपाल रोड) की कृषि भूमि को लीज पर लिया और इसमें हेराफेरी करके शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाई।

प्राप्त शिकायत के अनुसार, कंपनी ने साल 2018 से कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया था, लेकिन इसका उचित डायवर्जन शुल्क जमा नहीं कराया। जांच में पाया गया कि हल्का पटवारी विश्व प्रताप सिंह राजपूत और तत्कालीन राजस्व निरीक्षक अरूण तिवारी ने भूमि का निरीक्षण किए बिना पोर्टल पर वास्तविक भूमि से कम भूमि दर्ज की। इस चूक और मिलीभगत के कारण शासन को लगभग 9 लाख रुपये की क्षति हुई।

इसके अलावा, जिला पंजीयक की रिपोर्ट में पाया गया कि लीज एग्रीमेंट में स्टाम्प शुल्क का भुगतान सही मात्रा में नहीं किया गया। विभिन्न खसरा नंबरों की जांच के दौरान यह सामने आया कि लगभग 50,000 रुपये का स्टाम्प शुल्क जमा नहीं किया गया, जिससे सरकारी खजाने को और नुकसान हुआ।

FIR में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 120B के तहत और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)ए, 13(2), 7(C) के तहत मामला दर्ज किया गया है। EOW के अधिकारियों ने बताया कि पटवारी और राजस्व निरीक्षक ने बिना वैध दस्तावेज जैसे कि किरायानामा, मौके का निरीक्षण किए ही गलत गणना पत्रक तैयार किया, जिससे कंपनी को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ।

जांच के अनुसार, कुल आर्थिक हानि लगभग 9 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है, जिसमें डायवर्जन शुल्क में कमी से 9 लाख और स्टाम्प शुल्क में चोरी से 50 हजार रुपये शामिल हैं। EOW ने मामले की पूरी जानकारी जुटाने और आरोपियों की मिलीभगत की जांच करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।

यह मामला राज्य में सरकारी अधिकारियों और निजी बिल्डरों के बीच भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर समस्या को उजागर करता है। EOW का कहना है कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरोपी विश्व प्रताप सिंह राजपूत, अरूण तिवारी और सुभाष त्यागी के अलावा अन्य शामिल व्यक्तियों के नाम भी FIR में दर्ज हैं, और अब आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।